देहरादून/नरेंद्रनगर, 9 जून 2026। नरेंद्रनगर नगर पालिका परिषद चुनाव के दौरान मतदान केंद्र पर हुई एक कथित विवादित घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) की वरिष्ठ नेत्री प्रमिला रावत और उत्तराखंड सरकार के वन मंत्री सुबोध उनियाल के बीच तीखी बहस दिखाई दे रही है। घटना ने चुनावी प्रक्रिया, मतदान केंद्रों पर प्रोटोकॉल पालन और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
वायरल वीडियो में प्रमिला रावत मतदान केंद्र के भीतर मंत्री की मौजूदगी पर आपत्ति जताती दिखाई दे रही हैं। उनका आरोप है कि मतदान केंद्र के भीतर प्रवेश को लेकर निर्वाचन नियमों का उल्लंघन किया गया। वीडियो में दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक होती दिखाई देती है, जिसके बाद वहां मौजूद कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भी माहौल गरमा जाता है। वहीं महिला अकेले ही मंत्री और समर्थकों से भिड़ती दिख रही है और मंत्री को जाने पर मजबूर कर दिया। साथ ही महिला द्वारा राज्य को बेचे दिए जाने का भी आरोप लगाती दिख रही है, जो संभवतः कमजोर भूमि कानून और भ्रष्टाचार की तरफ़ इशारा था।
प्रमिला रावत ने वीडियो में कहा कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और नियम किसी व्यक्ति के पद या प्रभाव के आधार पर अलग-अलग नहीं हो सकते। उन्होंने मतदान केंद्रों पर निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने की मांग की।
दूसरी ओर, वीडियो में मंत्री सुबोध उनियाल भी अपनी बात रखते दिखाई देते हैं। हालांकि वायरल क्लिप का केवल एक हिस्सा सामने आने के कारण पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। घटना को लेकर प्रशासन या निर्वाचन अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोगों ने प्रमिला रावत के साहस और मुखर विरोध की सराहना की है, जबकि कुछ लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। राजनीतिक हलकों में भी यह वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है।
चुनावी नियम क्या कहते हैं?
निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान मतदान केंद्रों में प्रवेश को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित होते हैं। सामान्यतः मतदान केंद्र के भीतर केवल मतदाता, मतदान कर्मी, निर्वाचन आयोग द्वारा अधिकृत एजेंट और अनुमति प्राप्त अधिकारी ही प्रवेश कर सकते हैं। किसी भी प्रकार की अनधिकृत गतिविधि या मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास नियमों के दायरे में जांच का विषय बन सकता है।
जांच की मांग
विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर चुनावी नियमों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित अधिकारियों को तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर जनता का विश्वास बना रहे।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर विभिन्न दावे किए जा रहे हैं, लेकिन घटना के सभी तथ्यों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। निर्वाचन अधिकारियों की रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
(नोट: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और उपलब्ध दावों के आधार पर तैयार की गई है। वीडियो में किए गए सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। आधिकारिक जांच या प्रशासनिक रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों में बदलाव संभव है।)

