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उत्तराखंड कांग्रेस का धरना: पिछले 10 वर्षों के भूमि सौदों की निष्पक्ष जांच की मांग, स्थानीय युवाओं का शोषण और बेरोजगारी पर जोर

देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस ने सोमवार को राज्य सचिवालय के समक्ष भारी प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘भूमि माफिया’ को संरक्षण देने के आरोप में राज्य सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों ने राजीव भवन से मार्च निकाला, लेकिन पुलिस ने उन्हें राज्य सचिवालय के पास रोक दिया। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग के सामने धरना दिया। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और प्लेकार्ड्स के साथ माहौल गर्म रहा। एक छोटी झड़प के बाद कई नेताओं समेत गणेश गोदियाल को गिरफ्तार कर पुलिस लाइनों में भेज दिया गया।

यह प्रदर्शन केवल एक प्रतीकात्मक विरोध नहीं था, बल्कि पहाड़ की जमीन, स्थानीय युवाओं के भविष्य और पर्यावरणीय संतुलन को लेकर गहरी चिंता का प्रतीक था। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में हुए सभी भूमि सौदों, सरकारी भूमि के हस्तांतरण, भूमि उपयोग परिवर्तन और विभिन्न घोटालों की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

प्रदर्शन का पूरा विवरण और मांगें

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने संबोधन में कहा, “राज्य सरकार भूमि माफिया को संरक्षण दे रही है। सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाले ने साबित कर दिया है कि भूमि संबंधी मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत है।” उन्होंने मसूरी के जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र में प्राइम लैंड के आवंटन, डाकपत्थर में UJVNL की 180 एकड़ भूमि के हस्तांतरण और नैनीताल जिले के रामगढ़ क्षेत्र में सरकारी भूमि के निजी हाथों में ट्रांसफर जैसे मामलों पर सवाल उठाए।

गोदियाल ने चेतावनी दी कि यदि इन मामलों की जांच नहीं हुई तो राज्य को भविष्य में भूमि संकट, पर्यावरणीय असंतुलन और सामाजिक अशांति का सामना करना पड़ सकता है। कांग्रेस का स्पष्ट वादा है कि आने वाले समय में सभी भूमि सौदों की जांच की जाएगी। पार्टी ने मांग की है कि एक स्वतंत्र उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए जो पिछले एक दशक के सभी लैंड डील्स, आवंटनों और बदलावों की छानबीन करे।

डीडीहाट से कांग्रेस नेता प्रदीप पाल का बयान

प्रदर्शन के दौरान डीडीहाट से कांग्रेस नेता प्रदीप पाल ने विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों की समस्याओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “सरकार ने भूमि फ्रॉड के मामलों को होल्ड पर डाल दिया है। स्थानीय गांवों की जमीनें बाहर वालों द्वारा हासिल कर ली गई हैं। जिन गांववालों की अपनी जमीनें थीं, उन्हें इस सरकारी नीति के तहत सिर्फ गार्ड की नौकरी पर रख दिया गया है।”

पाल ने जोर देकर कहा कि पहाड़ की जवानी को ठगा जा रहा है। “पहाड़ की जवानी को ठगा गया है और बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है।” उन्होंने स्थानीय युवाओं की बेरोजगारी, पलायन और भूमि पर बाहरी हस्तक्षेप को जोड़ते हुए कहा कि यह न सिर्फ आर्थिक शोषण है बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से पहाड़ी पहचान को खतरे में डाल रहा है।

विस्तृत पृष्ठभूमि: उत्तराखंड में भूमि विवादों का इतिहास

उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से भूमि संबंधी मुद्दे हमेशा से विवादास्पद रहे हैं। पहाड़ी इलाकों में सीमित कृषि योग्य भूमि, जंगलों का बड़ा हिस्सा और पर्यटन पर निर्भर अर्थव्यवस्था ने भूमि को मूल्यवान बना दिया है। पिछले 10 वर्षों में विकास के नाम पर कई प्रोजेक्ट्स आए, लेकिन आरोप है कि इनका लाभ स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंचा।

कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा शासित सरकार ने भूमि माफिया को खुली छूट दी है। हरिद्वार, मसूरी, नैनीताल जैसे पर्यटन स्थलों में सरकारी भूमि निजी कंपनियों या व्यक्तियों को सौंपी गई। डाकपत्थर का UJVNL मामला विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जहां 180 एकड़ भूमि का हस्तांतरण विवादों में है।

डीडीहाट, मुनस्यारी और अन्य सीमांत क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर है। डीडीहाट के कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के अनुसार, गांवों में बाहरी लोग (अक्सर प्लेन क्षेत्रों से) बड़े-बड़े प्लॉट खरीद रहे हैं। स्थानीय किसान या मालिक जिनकी जमीन चली गई, उन्हें सुरक्षा गार्ड या निम्न स्तर की नौकरियों पर लगा दिया जाता है। यह “गार्ड बनाकर गार्डनर” वाली स्थिति युवाओं में गुस्सा पैदा कर रही है।

पहाड़ की जवानी पर प्रहार: उत्तराखंड में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से ऊपर है। युवा पढ़-लिखकर भी रोजगार नहीं पा रहे। पलायन की समस्या चरम पर है। कांग्रेस नेता कहते हैं कि भूमि सौदों में पारदर्शिता न होने से स्थानीय संसाधनों पर बाहरी नियंत्रण बढ़ रहा है, जिससे सांस्कृतिक अस्मिता खतरे में है।

कांग्रेस के वादे और भविष्य की योजना

कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से वादा किया है कि सत्ता में आने पर या दबाव बनाकर सभी भूमि डील्स की जांच होगी। एक निष्पक्ष आयोग गठित किया जाएगा जो:

  • पिछले 10 वर्षों के सभी सरकारी भूमि आवंटन
  • भूमि उपयोग परिवर्तन (land use change)
  • अतिक्रमण के मामलों
  • पर्यटन, हाइड्रो और अन्य प्रोजेक्ट्स से जुड़े सौदों

की जांच करेगा। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

प्रदीप पाल ने जोड़ा, “स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। भूमि वापसी के प्रयास किए जाएंगे और बेरोजगारी कम करने के लिए स्किल डेवलपमेंट, पर्यटन आधारित रोजगार और कृषि सुधार लाए जाएंगे।”

पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव

भूमि सौदों का पर्यावरण पर गहरा असर पड़ रहा है। हिमालयी क्षेत्र में अनियोजित निर्माण भूस्खलन, जल संकट और जैव विविधता हानि का कारण बन रहे हैं। कांग्रेस ने चेताया कि यदि यह जारी रहा तो पहाड़ी गांव खाली हो जाएंगे।

सामाजिक रूप से, बाहरी खरीदारी से स्थानीय समुदायों में असंतोष बढ़ रहा है। “पहाड़ की जवानी ठगी जा रही है” – प्रदीप पाल का यह वाक्य आज के युवा आंदोलन का सार बन गया है।

विस्तार: विभिन्न जिलों की स्थिति

पिथौरागढ़/ डीडीहाट क्षेत्र: यहां प्रदीप पाल के नेतृत्व में स्थानीय स्तर पर कई बैठकें हुई हैं। गांवों में सर्वेक्षण से पता चला कि कई हेक्टेयर जमीन बाहरी हाथों में चली गई। स्थानीय लोग गार्ड की नौकरी कर रहे हैं जबकि उनकी जमीन पर रिसॉर्ट या होटल बन रहे हैं।

नैनीताल और मसूरी: रामगढ़ और जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्रों में महंगे प्लॉट्स बेचे गए। पर्यटक इलाकों में स्थानीयों की भागीदारी नगण्य है।

हरिद्वार: नगर निगम घोटाले ने बड़े पैमाने पर अनियमितताएं उजागर कीं, जहां 2 IAS नौकरी से बर्खास्त किए गए हैं।

कुमाऊं और गढ़वाल: दोनों क्षेत्रों में समान पैटर्न – विकास के नाम पर शोषण। पर्यावरण में भी गंभीर हानि हुई है, जिससे पहाड़ों में परिवर्तन साफ दिख रहा है। गर्मियों में भीषण गर्मी और बरसात में भीषण बरसात, भूस्खलन और बादल फट रहे हैं।

युवा आंदोलन और कांग्रेस की रणनीति

कांग्रेस ने युवा विंग को सक्रिय किया है। “पहाड़ बचाओ, युवा बचाओ” अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। बेरोजगारी पर डेटा: उत्तराखंड में लाखों युवा बेरोजगार हैं। सरकारी आंकड़ों से भी यह साफ है कि रोजगार सृजन अपर्याप्त है।

प्रदीप पाल कहते हैं, “सरकार भूमि फ्रॉड केस होल्ड पर रखकर माफिया को बचाना चाहती है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

राजनीतिक आयाम

यह प्रदर्शन 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। कांग्रेस भूमि, रोजगार और पर्यावरण को मुख्य मुद्दा बना रही है। भाजपा सरकार पर आरोप है कि वह विकास के नाम पर बाहरी पूंजी को प्राथमिकता दे रही है।

कांग्रेस का दावा: पारदर्शी नीति से स्थानीय उद्यमिता बढ़ेगी, युवाओं को रोजगार मिलेगा और पहाड़ सुरक्षित रहेगा।

आगे की दिशा

उत्तराखंड कांग्रेस का यह धरना सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि पहाड़ की लड़ाई का प्रतीक है। गणेश गोदियाल, प्रदीप पाल और अन्य नेताओं ने स्पष्ट संदेश दिया – भूमि जनता की है, इसे लूटने नहीं देंगे।

आने वाले समय में सभी भूमि सौदों की जांच होगी, फ्रॉड केस खोले जाएंगे, स्थानीय युवाओं को न्याय मिलेगा। बेरोजगारी दूर करने और “पहाड़ की जवानी” को सशक्त बनाने के वादे के साथ कांग्रेस आगे बढ़ रही है।

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