**देहरादून:** उत्तराखंड वन विभाग के उप प्रभागीय वन अधिकारी (SDO) **राजीव नयन नौटियाल** ने मीडिया के सामने खुलकर अपनी जान को खतरे की बात कही है। अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने वाले इस अधिकारी को लगातार धमकियां मिल रही हैं। लंबे समय से सुरक्षा की मांग के बावजूद उन्हें पर्याप्त संरक्षण नहीं मिल पाया है।
अब उन्होंने राज्य के **डीजीपी** से सीधे गुहार लगाई है कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।राजीव नयन नौटियाल चकराता वन प्रभाग के अंतर्गत कालसी के SDO हैं। वे लंबे समय से यमुना नदी के किनारे और आसपास अवैध खनन (illegal mining) के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। उनके इस साहसिक कार्य ने खनन माफिया को चुनौती दी है, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
पुरानी घटना और हाईकोर्ट का संज्ञान
गौरतलब है कि **26 फरवरी 2026** को विकासनगर के बाड़वाला यमुना पुल (हरिपुर-कालसी ब्रिज) के पास एक गंभीर घटना हुई थी। जब राजीव नयन नौटियाल अपनी टीम के साथ अवैध खनन की जांच कर रहे थे और एक डंपर का वीडियो बना रहे थे, तभी खनन माफिया से जुड़े लोगों ने उनके साथ मारपीट की। उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया, कॉलर पकड़कर धक्के दिए गए और थप्पड़ मारे गए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।इस मामले में न केवल राजीव नयन नौटियाल ने खनन माफिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया, बल्कि माफिया पक्ष ने भी उनके खिलाफ क्रॉस-एफआईआर दर्ज कराई। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने इस पूरे प्रकरण का स्वतः संज्ञान लिया और राज्य सरकार व पुलिस पर सख्त टिप्पणी की।
मार्च 2026 में न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने कहा था – **“यह क्या हो रहा है? आप अपने ही अधिकारी की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं।”** अदालत ने विकासनगर पुलिस स्टेशन के पूरे स्टाफ के ट्रांसफर के आदेश दिए, खनन माफिया से संभावित सांठगांठ की जांच का निर्देश दिया और राजीव नयन नौटियाल की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। अदालत ने साफ कहा कि ईमानदार अधिकारी को माफिया के दबाव में नहीं डाला जाना चाहिए।
वर्तमान स्थिति और सुरक्षा की मांग
इस घटना के कई महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। राजीव नयन नौटियाल ने मीडिया को बताया कि धमकियां लगातार जारी हैं। उन्होंने कहा कि अवैध खनन रोकने के उनके प्रयासों के कारण उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा खतरे में है। लंबे समय से दी जा रही सुरक्षा की मांग के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते अब उन्होंने **डीजीपी** से व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप की अपील की है।
क्यों जरूरी है ईमानदार अधिकारियों की सुरक्षा?
यह मामला केवल एक अधिकारी की व्यक्तिगत सुरक्षा का नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता और सुशासन का सवाल है। जब राज्य के ईमानदार, निडर और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी खनन माफिया, वन्य जीव तस्करों या अन्य अवैध तत्वों के निशाने पर आ जाते हैं, तो यह पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है।
**वन संरक्षण और पर्यावरण:** उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में वन विभाग के अधिकारी पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षक होते हैं। यदि उन्हें सुरक्षा नहीं मिलेगी, तो अवैध खनन, पेड़ कटाई और नदी दोहन बढ़ेगा, जिससे भूस्खलन, बाढ़ और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी समस्याएं और गंभीर होंगी।
– प्रेरणा और नैतिकता: ऐसे अधिकारी जो बिना डरे कर्तव्य निभाते हैं, वे युवा पीढ़ी और अन्य कर्मचारियों के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं। यदि उन्हें खतरा महसूस होगा, तो ईमानदारी से काम करने की हिम्मत कौन करेगा?
कानून का राज: राज्य सरकार और पुलिस का दायित्व है कि जो अधिकारी जनहित में काम कर रहे हैं, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। हाईकोर्ट पहले ही टिप्पणी कर चुका है कि “अपने ही लोगों की सुरक्षा नहीं कर पाना” चिंताजनक है।
राजीव नयन नौटियाल जैसे अधिकारी उत्तराखंड के जंगलों, नदियों और पहाड़ों की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं। उनकी सुरक्षा न केवल उनकी जान बचाएगी, बल्कि राज्य में कानून व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती देगी। राजीव नयन नौटियाल ने अपनी इस लड़ाई में अकेले पड़ने की बात कही है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अवैध गतिविधियों के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
अब देखना यह है कि राज्य सरकार और पुलिस इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाती है और उन्हें तत्काल प्रभावी सुरक्षा मुहैया कराती है।—यह मामला उत्तराखंड में माफिया राज और ईमानदार अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर उठने वाले बड़े सवालों को रेखांकित करता है।

