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रानीबाग चौपाटी विवाद गहराया: मंदिर समाज की भूमि पर कब्जा कर मनोरंजन के लिए चौपाटी निर्माण का आरोप, सत्ता पक्ष के नेताओं की मिलीभगत के आरोप भी लगे, पहाड़ी आर्मी और सीता मनराल के नेतृत्व में कत्यूरी समाज ने मुख्यमंत्री से मांगी उच्चस्तरीय जांच

देवभूमि के लोग | विशेष रिपोर्ट
हल्द्वानी/रानीबाग, 11 जुलाई 2026।

नैनीताल जनपद के रानीबाग क्षेत्र में स्थित चौपाटी को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सीता मनराल के नेतृत्व में कत्यूरी समाज ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक विस्तृत ज्ञापन भेजकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। वहीं पहाड़ी आर्मी के अध्यक्ष हरीश रावत ने इस पूरे मुद्दे पर प्रशासन को अल्टीमेटम दे दिया है।

कत्यूरी समाज का आरोप है कि रानीबाग क्षेत्र में मंदिर समाज से संबंधित भूमि पर अतिक्रमण एवं कब्जा कर मनोरंजन के उद्देश्य से चौपाटी विकसित की गई, जिससे धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक भावनाएं आहत हुई हैं। समाज का कहना है कि यदि यह आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह केवल भूमि का मामला नहीं बल्कि उत्तराखंड की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा गंभीर विषय है। कत्यूरी समाज उत्तराखंड का एक बड़ा समाज है जो हर वर्ष कुमाऊं-गढ़वाल- नेपाल और देश के अन्य हिस्सों से भी रानीबाग में एकत्र होता है और मां जियारानी को अपनी कुलदेवी मानता है।

ज्ञापन में कहा गया है कि मंदिरों और उनसे जुड़ी धार्मिक संपत्तियां सार्वजनिक आस्था का विषय हैं। ऐसे में यदि किसी धार्मिक या मंदिर समाज की भूमि का उपयोग बिना विधिसम्मत प्रक्रिया के किसी व्यावसायिक या मनोरंजन गतिविधि के लिए किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। आरोप लग रहे हैं कि कुछ सत्ता पक्ष के नेताओं, भूमि माफिया और कुछ राजनेताओं के संरक्षण में यह अवैध कार्य किया गया है तथा सोशल मीडिया में तरह तरह की बातें आ रही हैं।

कत्यूरी समाज ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र एवं सक्षम एजेंसी से कराई जाए। समाज का कहना है कि भूमि के स्वामित्व, निर्माण की स्वीकृतियों, राजस्व अभिलेखों तथा संबंधित विभागों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति जनता के सामने आ सके। कत्यूरी समाज ने तत्काल पूरे परिसर को ताड़ बाड़ कर सुरक्षित करने की मांग करी है।

इसी क्रम में पहाड़ी आर्मी ने भी इस मुद्दे पर प्रशासन के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया है। संगठन के अध्यक्ष हरीश रावत के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने संबंधित उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को ज्ञापन सौंपते हुए 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। संगठन का कहना है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर मामले की निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की जाती और आवश्यक कार्रवाई नहीं होती, तो वह लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से व्यापक जनआंदोलन शुरू करेगा।

ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि इस पूरे मामले में सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं की संलिप्तता की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। समाज ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि यदि जांच में किसी जनप्रतिनिधि, अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी बिना किसी राजनीतिक पक्षपात के कार्रवाई की जाए।

सीता मनराल ने कहा कि कत्यूरी समाज उत्तराखंड की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। समाज का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाना नहीं, बल्कि कानून के शासन, पारदर्शिता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को सुनिश्चित करना है। इसके अतिरिक्त रानीबाग में ही नैनीताल जनपद का शवदाह भी है, जहां रोजाना हजारों लोग शवदाह करने आते हैं, और मंदिर की भूमि में मनोरंजन की चौपाटी खोलना अपने आप में गंभीर स्थिति दर्शाता है। इस संबंध में समाज सेवियों ने भारत सरकार, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भेजें हैं और मिलीभगत में सम्मिलित नेताओं को तत्काल दंडित करने की मांग की गई है।

कत्यूरी समाज ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो उत्तराखंड के कुमाऊं, गढ़वाल और जौनसार सहित हिमाचल, नेपाल तथा देश-विदेश में बसे कत्यूरी समाज के लोग लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए बाध्य होंगे।

गौरतलब है कि कत्यूरी समाज उत्तराखंड का एक प्रमुख ऐतिहासिक एवं सामाजिक समुदाय है, जो समय-समय पर अपनी सांस्कृतिक धरोहर, प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण के मुद्दे उठाता रहा है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और प्रशासन पर हैं कि इस प्रकरण में जांच, राजस्व अभिलेखों के परीक्षण तथा आवश्यक कार्रवाई को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।

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