नई दिल्ली: नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन अब एक राष्ट्रव्यापी जनाक्रोश का रूप ले चुका है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्ष द्वारा आयोजित ‘संसद मार्च’ और विरोध प्रदर्शनों के बाद पूरे देश में जवाबदेही (Accountability) और परीक्षा प्रणाली में आमूलचूल बदलाव की मांग गूंज रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के 26 दिनों के अनशन और 20 जुलाई को हुए ‘संसद मार्च’ के दौरान पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।
मुख्य घटनाक्रम और ताजा अपडेट्स (Key Developments)
- विपक्ष और छात्र संगठनों का कड़ा रुख: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को प्राथमिक शर्त बनाया है।
- सोनम वांगचुक का अनशन और सरकारी वार्ता: 26 दिनों तक जंतर-मंतर पर अनशन करने के बाद सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके बाद केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता के दौर जारी हैं।
- सुप्रीम कोर्ट की निगरानी: सर्वोच्च न्यायालय (CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ) ने जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग और लाठीचार्ज से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की सहमति जताई है। वहीं, एक अन्य पीठ ने परीक्षा में पारदर्शिता और ‘राधाकृष्णन समिति’ की सिफारिशों को लागू करने के लिए केंद्र से जवाब मांगा है।
- NTA में फेरबदल और कानून में संशोधन: चौतरफा दबाव के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं और सरकार ने ‘सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम’ में संशोधन कर 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का कड़ा प्रावधान करने का प्रस्ताव रखा है।
💥 प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाए गए देश के ज्वलंत मुद्दे (Burning Issues Demanded by Protesters)
जंतर-मंतर पर एकत्र हुए लाखों अभ्यर्थियों और देश भर में प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मुद्दे रखे हैं, जिन पर तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग की जा रही है:
1. परीक्षा प्रणाली की साख और संस्थागत जवाबदेही
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि बार-बार होते पेपर लीक नैतिक और प्रशासनिक नाकामी हैं, इसलिए शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
- NTA का पूर्ण पुनर्गठन: निजी और आउटसोर्स एजेंसियों पर अत्यधिक निर्भरता खत्म कर पारदर्शी, सरकारी नियंत्रण वाले कंप्यूटरीकृत/सुरक्षित परीक्षा मॉडल (जैसे IIT/यूपीएससी तर्ज) को लागू किया जाए।
2. युवाओं पर पुलिस कार्रवाई और मौलिक अधिकारों की रक्षा
- लाठीचार्ज व बल प्रयोग की जांच: 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज, वॉटर कैनन और कथित पेलेट गन के इस्तेमाल की निष्पक्ष जांच की जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
- छात्रों पर दर्ज FIR की वापसी: शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों और युवा नेताओं पर दर्ज कानूनी केस और FIR वापस ली जाएं।
3. पीड़ित परिवारों को न्याय और मुआवजा
- आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के लिए मुआवजा: परीक्षा रद्द होने, मानसिक तनाव और अनिश्चितता के कारण डिप्रेशन में आकर आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा और सामाजिक सहायता दी जाए।
4. युवाओं में बढ़ता मानसिक तनाव और बेरोजगारी का संकट
- समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया: प्रतियोगी परीक्षाओं का कैलेंडर निश्चित हो ताकि 2-3 सालों तक तैयारी करने वाले युवाओं का भविष्य अधर में न लटके।
- पारदर्शी शिकायत निवारण तंत्र: किसी भी परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराने और 30 दिनों के भीतर पारदर्शी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की व्यवस्था हो।

