नई दिल्ली, 7 फरवरी 2026 — दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क ने हाल ही में X पर एक भावुक पोस्ट किया: “जिसने भी कहा कि ‘पैसे से खुशी नहीं खरीदी जा सकती’, उसने सच में बहुत सही कहा था 😔”। यह पोस्ट फरवरी 2026 में वायरल हो गई, जब उनकी नेट वर्थ 850 अरब डॉलर से ज्यादा हो चुकी थी और वे ट्रिलियनेयर बनने की राह पर थे। पोस्ट को लाखों व्यूज मिले, और इसने दुनिया भर में पैसे, खुशी और अमीरी के बीच के रिश्ते पर नई बहस छेड़ दी।
इस बहस में शामिल हुए अन्य बिलियनेयर्स के विचार भी काफी चर्चित रहे:
- मार्क क्यूबन ने मस्क की पोस्ट पर जवाब दिया: “अगर तुम गरीब थे तब खुश थे, तो अमीर होने पर पागलों की तरह खुश होगे। अगर तब दुखी थे, तो अमीर होने पर भी दुखी रहोगे – बस अब आर्थिक तनाव कम होगा।” उनका मत था कि पैसा मौजूदा भावनाओं को बढ़ाता है, लेकिन मूल खुशी नहीं बदलता।
- वारन बफेट ने कहा है: “जिन बिलियनेयर्स को मैं जानता हूं, उनके लिए पैसा बस उनकी बेसिक ट्रेट्स को बढ़ा देता है। अगर वे पहले जर्क थे, तो बिलियन डॉलर के साथ बड़े जर्क बन जाते हैं।”
- रिचर्ड ब्रैनसन ने बार-बार दोहराया: “पैसे से खुशी नहीं खरीदी जा सकती।”
- ऑपरा विन्फ्रे का कहना है: “मैंने कभी पैसे की वजह से मुस्कुराया नहीं है।” वे खुशी को रिश्तों और उद्देश्य से जोड़ती हैं।
ये विचार पुरानी कहावत को दोहराते हैं, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययन इस पर ज्यादा जटिल तस्वीर पेश करते हैं।
वैज्ञानिक रिसर्च क्या कहती है?
- 2010 में डैनियल काह्नेमन (नोबेल विजेता) और एंगस डीटन के अध्ययन ने पाया कि रोजाना की भावनात्मक खुशी (emotional well-being) सालाना $75,000 (आज के समय में मुद्रास्फीति के बाद करीब $100,000–$110,000) तक बढ़ती है, उसके बाद प्लेटो (स्थिर) हो जाती है। लेकिन जीवन संतुष्टि (life evaluation) आय के साथ बढ़ती रहती है।
- 2021 में मैथ्यू किलिंग्सवर्थ (Wharton) के अध्ययन ने इसे चुनौती दी: 34,000+ लोगों से 1.7 मिलियन+ रीयल-टाइम रिपोर्ट्स से पता चला कि खुशी आय के साथ लगातार बढ़ती रहती है—$75,000 से ऊपर भी कोई प्लेटो नहीं।
- 2023 में दोनों ने मिलकर adversarial collaboration किया (PNAS में प्रकाशित): औसतन खुशी आय के साथ बढ़ती रहती है, कोई सख्त सीमा नहीं। लेकिन सबसे दुखी 20% लोगों में खुशी $100,000 तक बढ़ती है, फिर रुक जाती है। बाकी 80% में खुशी बढ़ती रहती है, और सबसे खुश लोगों में यह और तेजी से बढ़ती है।
- हालिया अध्ययन (2024–2025): किलिंग्सवर्थ की रिसर्च से पता चला कि $500,000+ आय वाले लोग औसत से काफी ज्यादा खुश हैं। 2025 में एक अध्ययन में $200,000+ वाले काम के बाहर ज्यादा खुश हैं, और इससे ऊपर काम पर भी। कोई सैचुरेशन पॉइंट नहीं दिखा। नवंबर 2025 में प्रकाशित रिसर्च में कहा गया कि $500,000 से ऊपर भी खुशी बढ़ती रहती है, कोई प्लेटो नहीं।
अन्य महत्वपूर्ण निष्कर्ष:
- पैसा बुनियादी जरूरतें (सुरक्षा, स्वास्थ्य, तनाव कम करना) पूरी करता है, जिससे खुशी बढ़ती है।
- उसके बाद रिश्ते, उद्देश्यपूर्ण काम, मानसिक स्वास्थ्य और दान करना ज्यादा मायने रखते हैं। एलिजाबेथ डन के अध्ययनों से: दूसरों पर खर्च करने से खुद पर खर्च से ज्यादा खुशी मिलती है।
- हार्वर्ड स्टडी ऑफ एडल्ट डेवलपमेंट (87 साल पुरानी): सबसे बड़ा फैक्टर मजबूत रिश्ते हैं, पैसा नहीं।
- कम आय वाले समाजों में भी लोग खुश रह सकते हैं अगर सामुदायिक जीवन मजबूत हो।
संक्षेप में, एलन मस्क की पोस्ट एक पुरानी सच्चाई को दोहराती है—पैसा खुशी खरीद सकता है, लेकिन केवल एक सीमा तक बहुत प्रभावी है। उसके बाद लाभ कम होते जाते हैं, और असली खुशी ज्यादातर गैर-आर्थिक चीजों (रिश्ते, अर्थ, शांति) से आती है। दुनिया के सबसे अमीर लोग भी यही मानते हैं कि दौलत के बावजूद संतुष्टि की तलाश जारी रहती है। क्या पैसा खुशी लाता है? हां, लेकिन पूरी तरह नहीं—यह सिर्फ एक हिस्सा है।

