देहरादून। उत्तराखंड की प्रशासनिक गतिविधियों में एक नया मोड़ आया है। देहरादून बार एसोसिएशन द्वारा जिलाधिकारी सविन बंसल के तबादले की मांग और राजस्व न्यायालयों के कार्यों का बहिष्कार जारी रहने के बीच हल्द्वानी और नैनीताल जिले के एक समूह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपील की है कि सविन बंसल को तुरंत नैनीताल जिले का जिलाधिकारी बनाया जाए। समूह का कहना है कि बंसल ने देहरादून में कुशलतापूर्वक काम किया है, लेकिन देहरादूनवासी उनकी क्षमता को नहीं पहचान पा रहे हैं, जबकि नैनीताल प्रशासन को उनके जैसे सक्षम अधिकारी की सख्त जरूरत है।
यह मांग ऐसे समय में उठी है जब देहरादून बार एसोसिएशन 4 अप्रैल से ही डीएम सविन बंसल के खिलाफ आंदोलनरत है। बार एसोसिएशन ने पूर्व बार अध्यक्ष प्रेम चंद शर्मा के लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश पर आपत्ति जताते हुए डीएम के तबादले की मांग की थी और राजस्व अदालतों का बहिष्कार शुरू कर दिया था। इस बहिष्कार से आम जनता को राजस्व संबंधी कामों में भारी परेशानी हो रही है। लेकिन अब हल्द्वानी और नैनीताल से आए नागरिकों का प्रतिनिधिमंडल इस विवाद को नए आयाम दे रहा है।
युवा समूह के कविंद्र सिंह और नागेश नेगी ने कहा, “डीएम सविन बंसल ने देहरादून में बेहद कुशलता और प्रभावशीलता से काम किया है। उनकी कार्यशैली में बुनियादी समझ और विकास की नींव रखने का दृष्टिकोण है, जो अब परिणाम दे रहा है। उन्होंने जिले में कई सुधार किए हैं, जिनका लाभ धीरे-धीरे सामने आ रहा है। लेकिन दुर्भाग्यवश देहरादून के कुछ लोग उनकी अहमियत को नहीं समझ पा रहे हैं। इसलिए सरकार को उन्हें नैनीताल भेजना चाहिए, जहां प्रशासन में कई कमियां हैं और ठीक-ठाक सुधार की जरूरत है। नैनीताल को ऐसे अधिकारी की सख्त जरूरत है जो जमीनी स्तर पर काम कर सके।”
देहरादून में सविन बंसल का कार्यकाल: उपलब्धियां और विवाद
सविन बंसल आईएएस अधिकारी हैं, जिन्हें सितंबर 2024 में देहरादून का जिलाधिकारी बनाया गया था। उनके कार्यकाल में जिले ने कई सकारात्मक बदलाव देखे। उन्होंने अवैध निर्माणों पर सख्ती की, मदरसों और अन्य संस्थानों की जांच कराई, संपत्ति खरीद-फरोख्त पर निगरानी बढ़ाई और आपदा प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाई। हाल ही में उन्होंने मस्सोरी रोड पर लैंडस्लाइड और फ्लैश फ्लड के खतरे को देखते हुए पर्यटकों को चेतावनी जारी की थी।
लेकिन बार एसोसिएशन के साथ उनका विवाद 25 मार्च की घटना से शुरू हुआ, जब पूर्व बार अध्यक्ष प्रेम चंद शर्मा (85 वर्ष) ने कलेक्टरेट न्यायालय में एक मामले की सुनवाई के दौरान कथित तौर पर अदालती मर्यादा भंग की। डीएम ने इसकी सूचना बार काउंसिल को दी और लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की। बार एसोसिएशन ने इसे “वकील बिरादरी का अपमान” बताया और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर डीएम के तबादले की मांग की। 6 अप्रैल तक स्थिति इतनी बिगड़ गई कि वकीलों ने राजस्व अदालतों, एडीएम कोर्ट और सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों का पूर्ण बहिष्कार कर दिया।
इस बहिष्कार से प्रॉपर्टी रजिस्ट्री, राजस्व मामलों की सुनवाई और अन्य जरूरी काम ठप हो गए हैं। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कुकरेती ने कहा था कि “जब तक डीएम का तबादला नहीं होता, बहिष्कार जारी रहेगा।” लेकिन अब हल्द्वानी-नैनीताल समूह इसे “देहरादून का नुकसान और नैनीताल का फायदा” बता रहा है।
नैनीताल की जरूरत: क्यों बंसल को भेजा जाए?
नैनीताल जिले में प्रशासनिक चुनौतियां लंबे समय से हैं। पर्यटन पर निर्भर इस जिले में ट्रैफिक प्रबंधन, अवैध निर्माण, जंगल की आग, भूस्खलन और पर्यटक सुविधाओं में कमी प्रमुख मुद्दे रहे हैं। हल्द्वानी और नैनीताल के नागरिकों का कहना है कि सविन बंसल जैसे अधिकारी, जो देहरादून में बुनियादी सुधार ला सके, नैनीताल में भी वही जादू दिखा सकते हैं।
कविंद्र सिंह ने विस्तार से बताया, “देहरादून में बंसल साहब ने जो नींव रखी है, वह अब फल-फूल रही है। उनकी कार्यशैली पारदर्शी, जमीनी और विकासोन्मुखी है। नैनीताल में प्रशासनिक सुधार की भारी जरूरत है – चाहे वह टूरिस्ट ट्रैफिक हो, अवैध होटल-निर्माण हो या राजस्व व्यवस्था। अगर सरकार उन्हें नैनीताल भेजती है तो जिला नई ऊंचाइयों को छू सकता है।”
नागेश नेगी ने जोड़ा, “देहरादूनवासी उनकी अहमियत नहीं समझ पा रहे। लेकिन हम हल्द्वानी और नैनीताल के लोग जानते हैं कि एक अच्छा प्रशासक कितना फर्क ला सकता है। हमने मुख्यमंत्री जी को ज्ञापन दिया है। हमारी मांग है कि डीएम बंसल को नैनीताल का चार्ज सौंपा जाए ताकि वहां की कमजोर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।”
सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित परिणाम
अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। उत्तराखंड में प्रशासनिक तबादले सामान्य हैं, लेकिन बार एसोसिएशन के आंदोलन के चलते यह मामला संवेदनशील हो गया है।
यदि सरकार इस मांग को मानती है तो देहरादून बार एसोसिएशन को राहत मिल सकती है, लेकिन नैनीताल में नए डीएम की नियुक्ति से वहां की व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगेगी।
पृष्ठभूमि और व्यापक प्रभाव
सविन बंसल का नाम उत्तराखंड प्रशासन में चर्चित रहा है। उन्होंने पहले अन्य जिलों में भी काम किया और हमेशा सख्ती व विकास के मिश्रण के लिए जाने गए। देहरादून में उनके कार्यकाल में अवैध मिश्रण हटाए गए, जांच हुई और संपत्ति लेन-देन पर निगरानी बढ़ी। इन कदमों से कुछ वर्ग खुश हैं तो कुछ असंतुष्ट।
नागरिकों की प्रतिक्रिया
देहरादून के कुछ नागरिकों ने बार एसोसिएशन के आंदोलन का समर्थन किया तो कुछ ने डीएम की कार्यशैली की सराहना की। एक स्थानीय व्यापारी ने कहा, “बंसल साहब ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई। उनका तबादला देहरादून के लिए नुकसान होगा।” वहीं नैनीताल के एक होटल व्यवसायी ने कहा, “अगर वे यहां आए तो पर्यटन और प्रशासन दोनों सुधरेंगे।”
प्रशासनिक संतुलन की जरूरत
यह घटनाक्रम उत्तराखंड प्रशासन के लिए एक चुनौती है। एक ओर बार एसोसिएशन का वैध विरोध, दूसरी ओर सक्षम अधिकारी की सराहना करने वाले नागरिकों की मांग। सरकार को दोनों पक्षों को संतुलित करना होगा। यदि सविन बंसल को नैनीताल भेजा जाता है तो यह “देहरादून का नुकसान, नैनीताल का फायदा” साबित हो सकता है, जैसा कि कविंद्र सिंह और नागेश नेगी कह रहे हैं।
फिलहाल मामला मुख्यमंत्री स्तर पर विचाराधीन है। अगले कुछ दिनों में कोई बड़ा फैसला आने की संभावना है। उत्तराखंड के विकास के लिए कुशल प्रशासकों का सही स्थानांतरण कितना जरूरी है

