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दर्दनाक सड़क हादसा: चंपावत के लोहाघाट में 500 मीटर गहरी खाई में गिरी कार, पिता-पुत्र गंभीर घायल; कार के परखच्चे उड़ गए

चंपावत (उत्तराखंड), 22 जून 2026 – उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रहे सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार दोपहर लोहाघाट तहसील के गल्लागांव-देवलीमाफी मोटर मार्ग पर बसौटी के पास एक अल्टो कार अनियंत्रित होकर करीब 500 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में कार सवार पिता-पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसके परखच्चे उड़ गए।

हादसे का विवरण

लोहाघाट के ढटी गांव निवासी नवीन कुमार (44 वर्ष) अपने 18 वर्षीय पुत्र सुनील कुमार के साथ अल्टो कार (UK03-2484) से लोहाघाट से घर लौट रहे थे। दोपहर करीब 1:30 बजे बसौटी के पास अचानक वाहन अनियंत्रित हो गया और गहरी खाई में समा गया।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण सड़क पर मलबा और कीचड़ जमा था। इसी वजह से कार फिसल गई और चालक नियंत्रण खो बैठा। कार खाई में गिरने के बाद बुरी तरह चट्टानों से टकराई, जिससे वह पूरी तरह से बर्बाद हो गई।

बहादुर ग्रामीणों ने बचाई जान

हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे। कई लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर गहरी खाई में उतरकर दोनों घायलों को बाहर निकाला। घायलों को तुरंत उप जिला अस्पताल लोहाघाट पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई गई। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।

जनप्रतिनिधियों का अस्पताल पहुंचना

हादसे की खबर मिलते ही क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि अस्पताल पहुंचे और घायलों का हालचाल लिया। इसमें शामिल थे:

  • सांसद अजय टम्टा
  • विधायक खुशाल सिंह अधिकारी
  • एसडीएम नीतू डांगर
  • पूर्व विधायक पूरन सिंह फर्त्याल
  • नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा
  • दर्जा राज्य मंत्री सुभाष बगौली

सभी ने चिकित्सकों से इलाज की अपडेट ली और परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

पहाड़ी सड़कों पर बढ़ते खतरे: हादसे नहीं रुक रहे, प्रशासन पूरी तरह असफल

यह हादसा उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते सिलसिले का एक और शर्मनाक उदाहरण है। पर्वतीय पर्यटन प्रदेश उत्तराखंड में सड़क हादसे लगातार हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन और सरकार की पूरी तरह से जवाबदेहीहीनता और घोर लापरवाही चिंता का विषय बन गई है। चाहे रोज लोग मौत के मुंह में जा रहे हों, सरकारी तंत्र में कोई हलचल नहीं, कोई जवाबदेही तय नहीं और कोई ठोस सुधार नहीं।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पहाड़ी सड़कों पर मौत का तांडव जारी है, फिर भी सरकार और प्रशासन केवल मौखिक आश्वासनों और जांच समितियों तक सीमित रह गए हैं। खड़ी चढ़ाई, तीखे मोड़, बारिश में मलबा गिरना, फिसलन भरी सड़कें, गार्ड रेलिंग की भयानक कमी और जंगली जानवरों का अचानक रास्ता पार करना – ये सब पुरानी समस्याएं हैं, जिन्हें सालों से जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।

प्रशासन की उदासीनता अब हद पार कर चुकी है। पर्यटन पर निर्भर इस राज्य में सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने के बजाय सरकार केवल पर्यटकों को लुभाने वाले प्रचार पर करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन सड़कों को सुरक्षित बनाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। मुसूरी, नैनीताल, चमोली, टिहरी, पिथौरागढ़ और चंपावत जैसे क्षेत्रों में लगातार हो रहे हादसों के बावजूद कोई दीर्घकालिक समाधान नहीं निकाला गया।

स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट रहा है – “कितने लोग मरेंगे तब जागेंगे? हर हादसे के बाद नेता अस्पताल पहुंचकर फोटो खिंचवाते हैं और आश्वासन देते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बदलती नहीं।” गार्ड रेलिंग लगाना, सड़कों की नियमित मरम्मत, बारिश के मौसम में मलबा हटाने की त्वरित व्यवस्था, चेतावनी बोर्ड और ड्राइवर जागरूकता अभियान – ये बुनियादी काम भी नहीं हो पा रहे।

पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही के बावजूद सड़कें मौत के जाल बनी हुई हैं। प्रशासन की इस क्रूर उदासीनता के कारण न सिर्फ स्थानीय निवासी बल्कि बाहरी पर्यटक भी अपनी जान गंवा रहे हैं। क्या सरकार को केवल पर्यटन राजस्व चाहिए, जानें नहीं? यह सवाल अब पूरे पहाड़ में गूंज रहा है।

उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाएं: महामारी बन चुकी समस्या

उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में सड़क दुर्घटनाएं अब महामारी का रूप ले चुकी हैं। सरकार की नीतियों और क्रियान्वयन की कमी ने पूरे प्रदेश को सड़क हादसों का हॉटस्पॉट बना दिया है। बारिश का मौसम शुरू होते ही हादसों का आंकड़ा बढ़ जाता है, लेकिन पूर्व तैयारी शून्य रहती है।

परिवार की स्थिति

घायल नवीन कुमार और सुनील कुमार का परिवार सदमे में है। ढटी गांव के लोग पूरे परिवार के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक रिपोर्ट में सड़क की स्थिति और मौसम को मुख्य कारण बताया जा रहा है, लेकिन असली सवाल प्रशासनिक नाकामी का है।

हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करती है। हम प्रशासन और सरकार से सख्त मांग करते हैं कि सड़क सुरक्षा को तुरंत प्राथमिकता दें, हादसों की रोकथाम के लिए ठोस और समयबद्ध कदम उठाएं तथा दोषियों पर जवाबदेही तय करें। पहाड़ हमारी जान-माल की सुरक्षा की मांग करते हैं – खोखले आश्वासनों की नहीं।

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