Fri. Jul 17th, 2026

कौन हैं उत्तराखंड के उभरते युवा क्रांतिकारी नेता भूपेंद्र कोरंगा, जो उत्तराखंड और देशभर में हो रहे हैं वायरल: जनसंघर्ष, युवा नेतृत्व और सामाजिक सेवा की बन रहे हैं मिसाल

हिमाजली एक्सप्रेस न्यूज| विशेष रिपोर्ट
बागेश्वर/कपकोट, उत्तराखंड

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से उभर रहे युवा नेतृत्व में यदि किसी नाम ने हाल के वर्षों में लगातार चर्चा बटोरी है, तो वह है भूपेंद्र कोरंगा। कपकोट विधानसभा क्षेत्र से जुड़े भूपेंद्र कोरंगा सामाजिक कार्यकर्ता, जनआंदोलनकारी और युवा नेतृत्व के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। प्रशासनिक व्यवस्थाओं, बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं, मूलभूत सुविधाओं और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर उनके आंदोलन प्रदेशभर में चर्चा का विषय रहे हैं।

पूर्व कुमाऊँ संयोजक, उत्तराखंड बेरोजगार संघ तथा उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में उन्होंने विभिन्न जनमुद्दों को मुखरता से उठाया। सोशल मीडिया पर उनके धरने, पदयात्राएं और अनशन व्यापक रूप से साझा किए गए, जिससे वे विशेषकर युवाओं के बीच एक चर्चित चेहरा बनकर उभरे।

संघर्ष से बनी पहचान

भूपेंद्र कोरंगा का कहना है कि उनका उद्देश्य व्यक्तिगत राजनीति नहीं, बल्कि जनसमस्याओं के समाधान के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करना है। पिछले कई वर्षों में उन्होंने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार सुविधा, रोजगार और पलायन जैसे मुद्दों को लेकर लगातार अभियान चलाए हैं।

उनके समर्थकों का मानना है कि उन्होंने उन विषयों को प्रमुखता से उठाया जिन पर लंबे समय से स्थानीय लोग आवाज उठा रहे थे।

पुरस्कार और सम्मान

सामाजिक एवं जनसेवा के क्षेत्र में सक्रियता के लिए उन्हें विभिन्न मंचों पर सम्मानित भी किया गया है।

  • 2012 – राज्यपाल स्काउट पुरस्कार
  • 2021 – कोरोना योद्धा सम्मान
  • 2022 – यूथ आइकॉन अवार्ड
  • 2023 – डॉ. भीमराव अंबेडकर रत्न अवार्ड
  • 2024 – उत्तराखंड द्रोणा रत्न अवार्ड

ये सम्मान उनके सामाजिक योगदान और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भागीदारी को दर्शाते हैं।

कोरोना काल में जनसेवा

कोविड-19 महामारी के दौरान जब दूरस्थ गांवों तक सहायता पहुंचाना चुनौतीपूर्ण था, तब भूपेंद्र कोरंगा ने स्वयंसेवकों के साथ मिलकर जरूरतमंद परिवारों तक राशन, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने का कार्य किया।

इसके अलावा सीमांत क्षेत्रों में बच्चों को गर्म कपड़े वितरित करना, जरूरतमंद मरीजों की आर्थिक सहायता करना, रक्तदान शिविरों में भाग लेना तथा अब तक 14 बार रक्तदान करना उनके सामाजिक कार्यों में शामिल बताया जाता है।

उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा में भी सहयोग किया और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों में भागीदारी निभाई।

संस्कृति संरक्षण का अभियान

भूपेंद्र कोरंगा केवल जनआंदोलनों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पिछले लगभग एक दशक से विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया है।

लीती गांव का बसंतोत्सव, दानपुर महोत्सव, कपकोट महोत्सव, रामगंगा घाटी महोत्सव और माजखेत घाटी महोत्सव जैसे आयोजनों में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।

इसके अतिरिक्त “द वॉयस ऑफ हिल” सिंगिंग रियलिटी शो के माध्यम से उन्होंने पहाड़ के युवा कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने का प्रयास किया।

जनआंदोलनों का लंबा सफर

मोबाइल नेटवर्क के लिए 65 किलोमीटर पदयात्रा

कपकोट क्षेत्र के अनेक गांव वर्षों तक मोबाइल नेटवर्क से वंचित रहे। इस समस्या को लेकर भूपेंद्र कोरंगा ने लगभग 65 किलोमीटर की पदयात्रा की। आंदोलन के बाद क्षेत्र में मोबाइल टावरों की स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

नर्सिंग भर्ती के लिए लंबा संघर्ष

नर्सिंग भर्ती के मुद्दे पर उन्होंने हल्द्वानी में तीन दिन का अनशन किया, 103 दिनों तक धरना दिया और हल्द्वानी से देहरादून तक लगभग 270 किलोमीटर पदयात्रा की। समर्थकों का दावा है कि इसके बाद नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को गति मिली।

भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग

उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों के दौरान उन्होंने बेरोजगार युवाओं के समर्थन में आंदोलन किए। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

UKSSSC पेपर लीक आंदोलन

UKSSSC पेपर लीक मामले के दौरान उन्होंने भूख हड़ताल सहित कई विरोध कार्यक्रमों में भाग लिया। इस दौरान पुलिस कार्रवाई भी हुई, लेकिन उन्होंने आंदोलन जारी रखा। बाद में इस मामले में व्यापक जांच और कार्रवाई हुई।

अन्य जनसंघर्ष

उन्होंने पेयजल, सड़क, पुल निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाओं, शराब की दुकानों के विरोध और स्थानीय विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी आंदोलन किए। एक आंदोलन के दौरान पानी की टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन करने के दौरान उन्हें चोट भी लगी।

पंचायत चुनाव में सफलता

वर्ष 2025 के पंचायत चुनाव में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी विजया कोरंगा का समर्थन किया। चुनाव में विजया कोरंगा जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुईं और स्थानीय स्तर पर युवा नेतृत्व को नई पहचान मिली।

वर्तमान गतिविधियां

हाल के समय में भूपेंद्र कोरंगा ने शामा क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, शराब दुकान स्थानांतरण तथा अन्य स्थानीय मांगों को लेकर आंदोलन किया। उन्होंने भूख हड़ताल सहित विभिन्न लोकतांत्रिक माध्यमों से प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।

साथ ही उन्होंने मूल निवास, भू-कानून, पलायन, सीमांत क्षेत्रों के विकास तथा अनुसूचित क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखी है।

युवाओं के बीच बढ़ती लोकप्रियता

भूपेंद्र कोरंगा के समर्थकों का कहना है कि उनका संघर्ष युवाओं को सामाजिक सरोकारों से जुड़ने की प्रेरणा देता है। वहीं उनके आंदोलनों की शैली को लेकर विभिन्न मत भी सामने आते रहे हैं। इसके बावजूद यह स्पष्ट है कि उन्होंने उत्तराखंड के अनेक जनमुद्दों को सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई है।

क्रांतिकारी तरीके से धरने के वीडियो देशभर में हो रहे वायरल

भूपेंद्र कोरंगा का सार्वजनिक जीवन सामाजिक सेवा, जनसंघर्ष और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रयासों से जुड़ा रहा है। उनके समर्थक उन्हें उत्तराखंड के युवाओं की आवाज बताते हैं, जबकि उनके आंदोलन प्रशासन और सरकार का ध्यान स्थानीय समस्याओं की ओर आकर्षित करने का माध्यम रहे हैं। लोग उन्हें आज का भगत सिंह जी बता रहे हैं।

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में, जहां पलायन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं जैसी चुनौतियां आज भी मौजूद हैं, वहां सक्रिय जनभागीदारी और लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। ऐसे में भूपेंद्र कोरंगा जैसे युवा कार्यकर्ताओं की भूमिका पर चर्चा लगातार बनी हुई है। बागेश्वर और उत्तराखंड वासी आशा करते हैं ऐसे निस्वार्थ संघर्ष शील युवा आने वाले उत्तराखंड का भविष्य अवश्य ही उज्जवल करेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *