देहरादून, 5 मई 2026, B P Singh – उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत जी के दूरदर्शी नेतृत्व में विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा, संस्कृत शिक्षा और समग्र शिक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से उठकर शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी कार्य करने वाले डॉ. रावत जी की मेहनत, समर्पण और विजन ने पूरे राज्य को ‘एजुकेशन हब’ बनाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए हैं। इस वर्ष शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड परिणाम उनके कुशल मार्गदर्शन का प्रमाण हैं।
डॉ. धन सिंह रावत जी का जन्म 7 अक्टूबर 1972 को पौड़ी गढ़वाल के एक सुदूर गांव में हुआ था। गांव की प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से इतिहास विषय में स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। भाजपा के वरिष्ठ नेता और श्रीनगर गढ़वाल विधानसभा क्षेत्र के विधायक के रूप में वे लगातार जनसेवा में तत्पर रहे हैं। स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा, सहकारिता, आपदा प्रबंधन आदि विभागों के साथ अब विद्यालयी शिक्षा, बेसिक एजुकेशन, माध्यमिक शिक्षा और संस्कृत शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं।
शिक्षा विभाग में सुधारों की बयार
डॉ. धन सिंह रावत जी ने पद संभालते ही शिक्षा विभाग में पारदर्शिता, जवाबदेही और परिणामोन्मुखी व्यवस्था पर जोर दिया। हाल ही में उन्होंने शिक्षा विभाग में डेपुटेशन स्टाफ को वापस बुलाने का बड़ा निर्णय लिया, जिससे मानव संसाधनों का बेहतर उपयोग और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो सकेगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार शिक्षा प्रणाली को मजबूत, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस वर्ष राज्य में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 200 स्कूलों में पहले से चल रहे कार्यक्रम को जारी रखते हुए अगले सत्र में 544 अतिरिक्त स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा शुरू करने का निर्णय लिया गया। डॉ. रावत जी का कहना है कि पारंपरिक शिक्षा के साथ कौशल विकास आवश्यक है, ताकि छात्रों को बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें। टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
रिकॉर्ड परिणाम और उपलब्धियां 2025-26
इस शैक्षणिक वर्ष में उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था ने कई रिकॉर्ड तोड़े हैं। उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) 50% के आंकड़े को पार कर गया है, जो देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है। अनुसूचित जनजाति में 51%, अनुसूचित जाति में 47% और महिला नामांकन 60% से अधिक पहुंच गया है। यह समावेशी विकास का उत्तम उदाहरण है।
विद्यालयी शिक्षा में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पिछले चार वर्षों में शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के प्रयासों का परिणाम अब दिख रहा है। लाखों छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने, डिजिटल क्लासरूम, स्मार्ट क्लास और लाइव वर्चुअल क्लासरूम की सुविधा प्रदान की गई। AI आधारित शिक्षण उपकरणों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
डॉ. रावत जी के नेतृत्व में 128 सहायक अध्यापकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए, जिससे शिक्षक कमी दूर हुई। स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे शिक्षकों के लिए विशेष समर्थन व्यवस्था बनाई गई। संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पाठ्यक्रम में गीता और रामायण जैसे प्राचीन ग्रंथों को शामिल करने का प्रस्ताव NCERT को भेजा गया।
उच्च शिक्षा में नवाचार और स्वायत्तता
उच्च शिक्षा विभाग में डॉ. रावत जी ने विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता प्रदान करने और नवाचार को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया। ‘शिक्षा सम्वाद चिंतन शिविर’ में उन्होंने 2025-26 के लिए रोडमैप प्रस्तुत किया, जिसमें गुणवत्ता वृद्धि, डिजिटलीकरण और रोजगारपरक शिक्षा पर फोकस था। UPES जैसे संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाया गया।
राज्य में नई डिजिटल लाइब्रेरी, ऑक्सीजन प्लांट, आधुनिक उपकरणों से लैस मेडिकल कॉलेज और रिसर्च सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। छात्रों को स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग, इंटर्नशिप और प्लेसमेंट सपोर्ट प्रदान किया जा रहा है।
ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा पहुंच
डॉ. रावत जी की प्राथमिकता दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा सुविधाएं पहुंचाना है। नए इंटर कॉलेज भवनों का उद्घाटन, पुरानी इमारतों का जीर्णोद्धार, छात्रावास निर्माण और शिक्षकों की नियमित ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। स्काउट्स एंड गाइड्स जैसे कार्यक्रमों को बढ़ावा देकर छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा रहा है।
TB मुक्त अभियान में ‘निक्षय मित्रों’ को सम्मानित किया गया, जिसमें शिक्षा विभाग की भूमिका सराहनीय रही।
चुनौतियों का सामना और भविष्य की योजनाएं
डॉ. रावत जी ने स्पष्ट किया कि शिक्षा क्षेत्र में चुनौतियां हैं, लेकिन उनके नेतृत्व में Team work से इन्हें पार किया जा रहा है। अगले वर्षों में 1000 से अधिक स्कूलों में डिजिटल सुविधाएं, व्यावसायिक कोर्सेस का विस्तार, शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को और तेज करना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को पूर्ण रूप से लागू करना प्रमुख लक्ष्य हैं।
वे कहते हैं, “शिक्षा से जुड़े सभी विभागों में समरूपता और समन्वय आवश्यक है। हम उत्तराखंड को शिक्षा के क्षेत्र में देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाएंगे।”
व्यक्तिगत स्पर्श और जनसेवा
डॉ. रावत जी का व्यक्तित्व सादगी और समर्पण का प्रतीक है। वे अक्सर क्षेत्रों का दौरा करते हैं, शिक्षकों और छात्रों से सीधा संवाद करते हैं। उनकी पत्नी दीपा रावत जी भी सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहती हैं।
उनके प्रयासों से न केवल परीक्षा परिणाम बेहतर हुए हैं, बल्कि ड्रॉपआउट दर घटी है, लड़कियों की भागीदारी बढ़ी है और कौशल विकास से युवा आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
रिकॉर्ड परिणाम उनके नेतृत्व की मिसाल
डॉ. धन सिंह रावत जी के कार्यकाल को उत्तराखंड शिक्षा इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा। उनकी मेहनत, दूरदृष्टि और जनकल्याणकारी नीतियों ने हजारों युवाओं का भविष्य संवार दिया है। इस वर्ष के रिकॉर्ड परिणाम उनके नेतृत्व की मिसाल हैं।
उत्तराखंड सरकार और पूरे राज्यवासियों को डॉ. रावत जी जैसे सक्षम, समर्पित और विजनरी नेता पर गर्व है। शिक्षा क्रांति जारी रहेगी और ‘विकसित उत्तराखंड’ का सपना साकार होगा।
जय हिंद! जय उत्तराखंड!!

