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देहरादून में कांग्रेस का हल्लाबोल: डॉ. महेंद्र सिंह पाल बोले—जनता बेरोजगारी से परेशान, सरकार सिर्फ विभाजनकारी राजनीति में व्यस्त

“नीतिगत पंगुता से जनता त्रस्त, अब चुनाव में 13 साल का हिसाब दे भाजपा”—कांग्रेस नेता का सरकार पर हमला

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सोमवार को कांग्रेस के प्रदर्शन और मुख्यमंत्री आवास कूच के दौरान प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान से जुड़े कथित ‘शुद्धिकरण’ विवाद और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR के विरोध में प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हाथीबड़कला क्षेत्र में बैरिकेडिंग कर रोकने का प्रयास किया, जिसके दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की स्थिति भी बनी।

इसी दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सांसद डॉ. महेंद्र सिंह पाल ने प्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उत्तराखंड की जनता अब सरकार की नीतिगत पंगुता से परेशान हो चुकी है।

डॉ. पाल ने आरोप लगाया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं, जबकि सरकार के सामने बेरोजगारी, महंगाई, पलायन और विकास जैसे वास्तविक मुद्दे हैं। उनका कहना था कि इन सवालों का समाधान करने के बजाय सरकार का राजनीतिक विमर्श लगातार विभाजनकारी मुद्दों के इर्द-गिर्द घूम रहा है।

“जनता को रोजगार चाहिए, राजनीति नहीं”

डॉ. महेंद्र सिंह पाल ने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं को भाषण नहीं बल्कि रोजगार और भविष्य की सुरक्षा चाहिए। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि प्रदेश में इतने वर्षों में विकास और रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम हुआ है तो उसकी उपलब्धियां जनता के सामने स्पष्ट रूप से क्यों नहीं रखी जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि पहाड़ का युवा रोजगार के लिए लगातार दूसरे राज्यों की ओर जा रहा है। गांवों से पलायन जारी है और कई परिवारों के सामने आज भी स्थायी रोजगार का संकट है।

उनके अनुसार, सरकार को जनता के वास्तविक मुद्दों पर जवाब देना चाहिए, न कि राजनीतिक और सामाजिक विभाजन पैदा करने वाले मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

“भाजपा अब 13 साल के काम पर चुनाव लड़े”

डॉ. पाल ने भाजपा को आगामी विधानसभा चुनाव में अपने कार्यों के आधार पर जनता के बीच जाने की चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार ने पिछले वर्षों में वास्तव में उल्लेखनीय काम किया है तो उसे 13 साल के काम का रिपोर्ट कार्ड लेकर जनता के बीच जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि चुनाव के समय जनता से सिर्फ भावनात्मक और विभाजनकारी मुद्दों पर वोट मांगने के बजाय सरकार को यह बताना चाहिए कि—

  • कितने युवाओं को स्थायी रोजगार मिला?
  • पहाड़ों से पलायन कितना रुका?
  • कितने नए उद्योग और रोजगार के अवसर पैदा हुए?
  • स्वास्थ्य सुविधाओं में कितना सुधार हुआ?
  • सरकारी स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति कितनी बदली?
  • पहाड़ों में सड़क, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं की क्या स्थिति है?
  • कितने गांवों में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है?

डॉ. पाल का कहना था कि जनता अब सवाल पूछ रही है और आने वाले चुनाव में सरकार को इन सवालों का जवाब देना पड़ेगा।

हल्द्वानी विवाद से बढ़ा राजनीतिक टकराव

कांग्रेस का सोमवार का प्रदर्शन हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद रामलीला मैदान में कथित ‘शुद्धिकरण’ की घटना को लेकर था। कांग्रेस इस मामले में कार्रवाई और राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की मांग कर रही है।

दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस पर सामाजिक विभाजन की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए प्रदेशभर में ‘सामाजिक सौहार्द संकल्प धरना’ आयोजित किया। देहरादून के गांधी पार्क में भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन किया।

इस तरह सोमवार को देहरादून में कांग्रेस और भाजपा दोनों के कार्यक्रमों ने प्रदेश की राजनीति को और गरमा दिया।

अब मुद्दा सड़क से चुनावी मैदान तक पहुंचने के संकेत

कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में रोजगार, महंगाई, पलायन और विकास जैसे मुद्दों को केंद्र में लाया जाना चाहिए। वहीं भाजपा कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों को सामाजिक सौहार्द से जोड़कर पलटवार कर रही है।

राजनीतिक रूप से देखा जाए तो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दलों के बीच मुद्दों की लड़ाई अब तेज होती दिखाई दे रही है।

डॉ. महेंद्र सिंह पाल का बयान इसी राजनीतिक बहस को रोजगार और सरकार के प्रदर्शन के मुद्दे पर ले जाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।

अब असली सवाल यही है—आगामी चुनाव में उत्तराखंड की जनता भावनात्मक मुद्दों पर फैसला करेगी या रोजगार, पलायन, स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास के पिछले वर्षों के कामकाज का हिसाब लेकर मतदान करेगी?

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