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पहाड़ी आर्मी के युवा नेता हरीश रावत बन रहे पहाड़ और पहाड़ी हिंदूओ की बुलंद आवाज़, जनहित के मुद्दों पर लगातार हैं मुखर, लाखों लोगो का लगातार मिल रहा समर्थन

भू-कानून, मंदिरों की भूमि से जुड़े विवाद, हल्द्वानी की जनसमस्याओं और पर्वतीय क्षेत्रों के मुद्दों को लगातार उठाने पर कत्यूरी संगठन सहित कई सामाजिक वर्गों का मिल रहा व्यापक समर्थन,

हल्द्वानी/उत्तराखंड | विशेष रिपोर्ट

उत्तराखंड में जनहित के विभिन्न मुद्दों को लेकर सक्रिय पहाड़ी आर्मी के युवा नेता हरीश रावत इन दिनों हल्द्वानी से लेकर पर्वतीय क्षेत्रों तक चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। समर्थकों का कहना है कि वे लगातार आम जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं, जिसके कारण युवाओं, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों के बीच उनकी स्वीकार्यता बढ़ रही है।

बताया जा रहा है कि हरीश रावत लंबे समय से सशक्त भू-कानून की मांग, मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों की भूमि पर कथित अतिक्रमण या कब्जे से जुड़े मुद्दों, पलायन, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल तथा हल्द्वानी की स्थानीय जनसमस्याओं को विभिन्न मंचों पर उठाते रहे हैं। समर्थकों का मानना है कि उन्होंने इन विषयों को लगातार सार्वजनिक बहस का हिस्सा बनाया है।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कत्यूरी संगठन से जुड़े कई कार्यकर्ता और सामाजिक लोग उनके जनहित कार्यों का समर्थन कर रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि हरीश रावत बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के समाज के बीच रहकर लोगों की समस्याओं को प्रशासन और सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। जिस प्रकार से उन्हें जगह जगह व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है उससे कई स्थानीय नेता भी सकते में नज़र आ रहे हैं।

हरीश रावत द्वारा समय-समय पर उत्तराखंड में मजबूत भू-कानून की आवश्यकता, पर्वतीय क्षेत्रों के संसाधनों की सुरक्षा तथा स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा जैसे विषयों पर अपनी बात रखी जाती रही है। उनके समर्थकों का कहना है कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से जुड़े मुद्दों पर भी उन्होंने अपनी आवाज़ बुलंद की है। विशेषकर पूरे देशभर में फैले कत्यूरी समाज से जुड़े रानीबाग भूमि पर अवैध कब्जे के मुद्दे पर प्रशासन को घेरने के मुद्दे के बाद वह चर्चा में आ गए और उनका जन समर्थन अब बढ़ता ही जा रहा है।

हल्द्वानी के स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर में यातायात, शिक्षा की लूट, स्वास्थ्य की बदहाली, अतिक्रमण, पेयजल, सफाई, बढ़ते शहरी दबाव और अन्य नागरिक समस्याओं को लेकर भी हरीश रावत लगातार सक्रिय रहते हैं। वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों को भी वे प्रमुखता से उठाते हैं।

समर्थकों का दावा है कि हरीश रावत अब केवल किसी एक संगठन के नेता नहीं, बल्कि पहाड़ और हल्द्वानी के आम लोगों की आवाज़ के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। उनका कहना है कि जनता के बीच लगातार सक्रिय रहने, निर्भीकता से अपनी बात रखने और जनहित के मुद्दों पर समर्पित भाव से काम करने के कारण उन्हें व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है।

राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड में जो भी जनप्रतिनिधि या सामाजिक कार्यकर्ता लगातार जमीनी मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाता है, वह स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। लोग उन्हें तीसरे विकल्प के रूप में उभरता हुआ देख रहे हैं और आगे वह आम जन के मुख्य पार्टियों से होते मोहभंग में एक बड़े विकल्प के तौर पर उभर सकते हैं।

जनता की अपेक्षा है कि राज्य में भू-कानून, पर्यावरण संरक्षण, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, स्थानीय युवाओं के रोजगार तथा पर्वतीय क्षेत्रों के समग्र विकास जैसे मुद्दों पर सभी पक्ष सकारात्मक पहल करें, ताकि उत्तराखंड के लोगों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का स्थायी समाधान निकल सके, जिसपर पहाड़ी आर्मी के अध्यक्ष हरीश रावत ने बड़ी पार्टियों के चेहरे पर जरूर शिकन छोड़ दी है और पहाड़ी आर्मी से जुड़े लोगों की सक्रियता से जनता की आवाज को निश्चित रूप से नई धार मिली है।

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