देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में महिला नेतृत्व लगातार मजबूत हो रहा है। इसी परिदृश्य में प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने महिला सुरक्षा, रोजगार, महंगाई, कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर सक्रिय राजनीतिक भूमिका निभाई है। उन्होंने विभिन्न आंदोलनों, धरना-प्रदर्शनों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से कांग्रेस की महिला इकाई को सक्रिय बनाने का प्रयास किया है।
उनकी राजनीतिक पहचान केवल संगठनात्मक पद तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे कई चर्चित आंदोलनों का सार्वजनिक चेहरा भी बनीं। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग हो, महिलाओं पर बढ़ते अपराधों के विरोध में “नारी न्याय आंदोलन” हो या नर्सिंग अभ्यर्थियों के समर्थन में प्रदर्शन—ज्योति रौतेला लगातार सड़क से लेकर संगठन तक सक्रिय दिखाई दीं।
सामान्य परिवार से प्रदेश नेतृत्व तक का सफर
ज्योति रौतेला का राजनीतिक सफर संगठनात्मक राजनीति से विकसित हुआ। उन्होंने कांग्रेस संगठन में विभिन्न स्तरों पर काम करने के बाद उत्तराखंड प्रदेश महिला कांग्रेस की कमान संभाली। उनके नेतृत्व में महिला कांग्रेस ने जिला और ब्लॉक स्तर पर संगठन विस्तार, महिला सम्मेलन, प्रशिक्षण कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियानों को गति देने का प्रयास किया।
उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने महिला कार्यकर्ताओं को केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रखा बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी सक्रिय रहने के लिए प्रेरित किया।
महिला सुरक्षा को बनाया प्रमुख राजनीतिक मुद्दा
उत्तराखंड में महिला सुरक्षा का विषय पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
ज्योति रौतेला ने विभिन्न अवसरों पर कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय केवल राजनीतिक नारा नहीं बल्कि सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
उन्होंने महिला अत्याचार, कानून-व्यवस्था, महंगाई और महिलाओं के आरक्षण जैसे मुद्दों पर कई विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। अगस्त 2024 में उनके नेतृत्व में ग्रीष्मकालीन विधानसभा सत्र के दौरान “नारी न्याय आंदोलन” भी आयोजित किया गया, जिसमें महिला सुरक्षा और अंकिता भंडारी मामले सहित कई मुद्दे उठाए गए।
अंकिता भंडारी मामले में मुखर भूमिका
2022 में अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया।
इस मामले में ज्योति रौतेला लगातार न्याय की मांग उठाने वाले नेताओं में शामिल रहीं।
सितंबर 2023 में उन्होंने सार्वजनिक विरोध के दौरान अपना सिर मुंडवाकर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। उन्होंने इसे पीड़िता के प्रति संवेदना और न्याय की मांग का प्रतीक बताया। यह प्रदर्शन राज्यभर में चर्चा का विषय बना।
उन्होंने कई बार इस मामले में निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और महिलाओं की सुरक्षा के लिए मजबूत व्यवस्था की मांग की।
नर्सिंग अभ्यर्थियों के आंदोलन में भागीदारी
प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में ज्योति रौतेला ने बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों के आंदोलन में भी भाग लिया।
आंदोलन के दौरान उनके विरोध के दृश्य व्यापक रूप से सोशल मीडिया पर साझा किए गए। कांग्रेस और महिला कांग्रेस ने इसे युवाओं के रोजगार से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
जनसंपर्क अभियान और संगठन विस्तार
प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने विभिन्न जिलों में महिला सम्मेलन, संवाद कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान चलाए।
इन अभियानों का उद्देश्य था—
- महिलाओं को संगठन से जोड़ना।
- महिला अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
- स्थानीय समस्याओं को संगठन तक पहुंचाना।
- महिला कार्यकर्ताओं को नेतृत्व के अवसर देना।
उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों में रोजगार, महंगाई, महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विषय प्रमुख रहे।
विपक्ष की राजनीति में सक्रिय भूमिका
ज्योति रौतेला ने समय-समय पर राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की है।
उन्होंने अपने सार्वजनिक बयानों में रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही की मांग की। जून 2026 के एक सार्वजनिक संदेश में उन्होंने कहा कि प्रदेश को बचाने, युवाओं को रोजगार देने और आम जनता को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।
महिला नेतृत्व की नई पीढ़ी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड में महिला नेतृत्व का स्वरूप बदल रहा है। अब महिला नेता केवल महिला संगठनों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रोजगार, शिक्षा, पर्यावरण, पलायन और शासन जैसे व्यापक विषयों पर भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
ज्योति रौतेला का राजनीतिक सफर इसी बदलाव का एक उदाहरण माना जाता है।
समर्थकों की नजर में
समर्थकों का कहना है कि—
- वे आंदोलन की राजनीति में सक्रिय रहती हैं।
- महिला कार्यकर्ताओं से लगातार संवाद करती हैं।
- सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर मुखर रहती हैं।
- संगठन को जमीनी स्तर तक ले जाने का प्रयास करती हैं।
- लगातार जनहित के मुद्दों पर देहरादून की सड़कों पर ज्योति रौतेला हमेशा मौजुद दिखीं।
महिला और छात्र हितों में सबसे आगे रहीं ज्योति रौतेला
ज्योति रौतेला उत्तराखंड की विपक्षी राजनीति में महिला नेतृत्व का एक प्रमुख चेहरा हैं। महिला सुरक्षा, सामाजिक न्याय, रोजगार और जन आंदोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें राजनीतिक पहचान दिलाई है साथ ही उन्हें मज़बूत आवाज के रूप में सरकार को घेरने में अकेले भी लड़ने की शक्ति के रूप में देखा जा रहा है। अंकिता भंडारी के न्याय के लिए उन्होंने अपना से तक मुंडा लिया।
हालांकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनके कार्यों और सरकार के दावों—दोनों का अंतिम मूल्यांकन जनता और मतदाता ही करते हैं। किंतु ज्योति रौतेला के संघर्ष को कई सत्ता पक्ष के लोगों और आम जनता ने सराहा है क्योंकि मजबूत विपक्ष लोकतंत्र को मजबूती देता है और सरकारों को जनता के प्रति और जवाबदेह बनाता है।

