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उत्तराखंड में ‘कत्यूरी किंगडम’ वाइन ब्रांड पर भारी आक्रोश: कत्यूरी समाज ने मांगा सख्त एक्शन, सांस्कृतिक विरासत का अपमान बताया

देवभूमि के लोग | विशेष रिपोर्ट
देहरादून/बागेश्वर/अल्मोड़ा/खटीमा, 3 जुलाई 2026: उत्तराखंड की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान से जुड़े कत्यूरी राजवंश के नाम का उपयोग प्रीमियम वाइन ब्रांड के रूप में किए जाने पर कत्यूरी समाज सहित पूरे राज्य में व्यापक आक्रोश फैल गया है। इस ब्रांड को “Katyuri Kingdom” नाम दिया गया है, जिसके खिलाफ सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। समाज के विभिन्न संगठन, बुद्धिजीवी, युवा और प्रवासी उत्तराखंडवासी इसे उत्तराखंड की गौरवशाली विरासत के साथ खिलवाड़ मान रहे हैं।

कत्यूरी राजवंश: उत्तराखंड की स्वर्णिम विरासत

कत्यूरी राजवंश उत्तराखंड (तत्कालीन कुमाऊं-गढ़वाल क्षेत्र) का प्राचीन और गौरवशाली राजवंश था। इस वंश ने कई शताब्दियों तक यहां शासन किया और हिंदू मंदिरों, मठों तथा सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत किया। कत्यूरी शासकों ने जोशीमठ, बैजनाथ, बैदिनाथ आदि जैसे प्रसिद्ध मंदिरों का निर्माण या संरक्षण कराया। कत्यूरी नाम न केवल एक राजवंश का प्रतीक है, बल्कि देवभूमि की धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और हजारों वर्ष पुरानी ऐतिहासिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। समाज का मानना है कि ऐसे पवित्र नाम को मादक पेय उत्पाद से जोड़ना करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य है।

ब्रांड और कंपनी का विवरण

इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार Golden Fun Foods & Beverage Pvt. Ltd. नामक कंपनी ने इस ब्रांड को लॉन्च किया है। कंपनी की स्थापना वर्ष 2015 में की गई थी। कंपनी का बुटीक वाइनरी परिसर उत्तराखंड के शिवारिक क्षेत्र के सिन्याड़ी गांव में स्थित है। कंपनी का दावा है कि उसकी वाइन श्रृंखला में उत्तराखंड की स्थानीय उपज जैसे सेब, नाशपाती, प्लम, काफल, हिसालू, आम और विभिन्न साइट्रस फलों का उपयोग किया जाता है। कंपनी इसे हिमालयी विरासत और प्रीमियम वाइन निर्माण से जोड़कर वैश्विक बाजार में पहचान दिलाने का प्रयास बता रही है।

हालांकि, कत्यूरी समाज का कहना है कि स्थानीय फलों का उपयोग सकारात्मक हो सकता है, लेकिन ऐतिहासिक राजवंश के नाम का दुरुपयोग पूरी तरह अनुचित है और वह भी शराब के नाम पर। यह पूर्णतः अस्वीकार्य और सांस्कृतिक विरासत पर चोट है और इतनी हिमाकत करने वालों को बख्शा नहीं जा सकता।

समाज और जनता की तीखी प्रतिक्रिया

कत्यूरी समाज के प्रतिनिधियों ने कहा, “कत्यूरी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि उत्तराखंड के स्वर्णिम इतिहास, संस्कृति, मंदिर परंपरा और हजारों वर्षों की विरासत का जीवंत प्रतीक है।” उन्होंने आरोप लगाया कि यह ब्रांडिंग सांस्कृतिक अपमान है और व्यापारिक लाभ के लिए धार्मिक व ऐतिहासिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रहा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हजारों लोग इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जता रहे हैं। कई युवा और बुद्धिजीवी इसे “देवभूमि की आस्था के साथ खिलवाड़” बता रहे हैं। समाज ने राज्य सरकार और आबकारी विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

कत्यूरी समाज की प्रमुख मांगें:

  • “कत्यूरी” नाम का शराब या किसी भी मादक उत्पाद के लिए उपयोग तुरंत बंद किया जाए।
  • कंपनी ब्रांड नाम वापस ले या पूरी तरह बदल दे।
  • कंपनी सार्वजनिक माफी मांगे और उत्तराखंड से अपना व्यवसाय वापस ले ले।
  • जिसने भी इस ब्रांड को अनुमति दी, उस अधिकारी/अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, उन्हें बर्खास्त कर जेल भेजा जाए।
  • उत्तराखंड सरकार ऐतिहासिक राजवंशों, लोकनायकों, देवी-देवताओं और सांस्कृतिक प्रतीकों के व्यावसायिक उपयोग पर स्पष्ट नीति बनाए।
  • सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए मजबूत कानूनी व्यवस्था विकसित की जाए।

समाज के प्रतिनिधियों ने लोकतांत्रिक और कानूनी माध्यमों से विरोध जारी रखने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो जिम्मेदारी पूरी तरह सरकार की होगी।

पहले के विवादों से तुलना

उत्तराखंड में इससे पहले भी धार्मिक नामों वाले शराब ब्रांडों पर विवाद हो चुका है। हाल ही में “त्रिकाल” व्हिस्की ब्रांड (जो भगवान शिव से जुड़ा माना जाता है) पर भारी विरोध हुआ था। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया था कि ब्रांड को निर्माण, पंजीकरण या बिक्री की कोई अनुमति नहीं दी गई। ऐसे कई मामले देवभूमि में सांस्कृतिक संवेदनशीलता को रेखांकित करते हैं।

आगे क्या?

यह विवाद अब उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक सम्मान और व्यावसायिक ब्रांडिंग के बीच संतुलन को लेकर एक बड़ी बहस का विषय बन गया है। कत्यूरी समाज और अन्य संगठन सरकार से लिखित शिकायत कर चुके हैं और जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं और समाज की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। हम सभी पक्षों के विचारों का सम्मान करते हैं और सांस्कृतिक संवेदनशील मुद्दों पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हैं।

आपकी प्रतिक्रिया या अतिरिक्त जानकारी के लिए कमेंट करें।

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