डीडीहाट, पिथौरागढ़, उत्तराखंड: डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र में विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की भयानक कमी को लेकर राजनीतिक आग भड़क उठी है। कांग्रेस के स्थानीय नेता प्रदीप सिंह पाल ने भाजपा विधायक बिशन सिंह चुफाल और राज्य सरकार पर सबसे तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 30 वर्षों में भाजपा के लगातार प्रभाव और विधायक के कई कार्यकाल के बावजूद डीडीहाट को जानबूझकर उत्तराखंड का सबसे पिछड़ा और उपेक्षित क्षेत्र बनाया गया है। विधायक खुद को “सुरमा” (बहादुर योद्धा) घोषित कर रहे हैं, लेकिन हकीकत में क्षेत्र मौत के मुंह में है – अस्पतालों में डॉक्टर नहीं, एम्बुलेंस नहीं, सड़कें टूटी-फूटी, शिक्षा का नामोनिशान नहीं।
प्रदीप पाल ने कहा, “डीडीहाट की सरकार और भाजपा विधायक बिशन सिंह चुफाल ने पूर्ण रूप से विफलता साबित की है। 30 साल से क्षेत्र को पिछड़ा बनाए रखा गया है। विधायक खुद को सुरमा बताते हैं, लेकिन डीडीहाट उत्तराखंड के सबसे पिछड़े इलाकों में शुमार है। अस्पतालों में बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं नहीं – डॉक्टरों की 70% कमी, विशेषज्ञों का अभाव, एम्बुलेंस का इंतजार मौत का इंतजार है। गंभीर मरीजों को घंटों दूर ले जाना पड़ता है, कई जानें जा चुकी हैं। धारचूला और मुनस्यारी आज सुविधासंपन्न हैं, पर्यटन और कनेक्टिविटी में आगे – लेकिन डीडीहाट में कैलाश मानसरोवर रूट के निकट होने, मलयनाथ मंदिर, कोटगड़ी मंदिर, अन्य पूजन स्थल, डीडीहाट, कनालिचीना, अस्कोट, झुलाघाट जैसे सुंदर प्राकृतिक पर्यटन स्थल के बावजूद इनका कोई विकास नहीं हो सका । विधायक को जनता की जान की परवाह नहीं, सिर्फ कुर्सी की लड़ाई है!”
स्वास्थ्य सेवाओं की भयावह स्थिति: मौत का खेल
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में स्वास्थ्य संकट CAG रिपोर्ट (2022) में उजागर हो चुका है – पहाड़ी इलाकों में डॉक्टरों की 70% कमी। डीडीहाट में यह और भी खतरनाक:
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) 25 साल पुराना, लेकिन डॉक्टर, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, दवाइयां और उपकरणों की भारी कमी।
- जनवरी 2026 में विधायक निधि से पहली एम्बुलेंस मिली – 25 साल बाद! इससे पहले इमरजेंसी में निजी टैक्सी या पैदल ले जाना पड़ता था। मानसून और बर्फबारी में रास्ते बंद, एम्बुलेंस पहुंच ही नहीं पाती।
- विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से महिलाओं की डिलीवरी, बच्चों की बीमारियां और बुजुर्गों का इलाज अधूरा। कई मामलों में रेफरल के दौरान मौत हो जाती है।
- प्रदीप पाल ने कहा, “यह मौत का खेल है। विधायक और सरकार को जनता की जान सस्ती लगती है। अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में भी कमी है, लेकिन डीडीहाट में यह चरम पर है – कोई जवाबदेही नहीं!”
अन्य क्षेत्रों से तुलना में शर्मनाक पिछड़ापन
- धारचूला और मुनस्यारी आगे: ये क्षेत्र पर्यटन, बॉर्डर विकास और बेहतर सड़कों से सुविधासंपन्न हैं। मुनस्यारी में ट्रेकिंग और पंचचूली प्रमोशन, धारचूला में जौलजीबी मेला – लेकिन डीडीहाट में पर्यटन की अपार संभावना के बावजूद कोई इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं।
- सड़क और कनेक्टिविटी: कच्ची सड़कें, भूस्खलन से गांव हफ्तों कटे रहते हैं। कुछ लिंक रोड की स्वीकृति आई, लेकिन रखरखाव नहीं – अधूरे वादे।
- शिक्षा का संकट: सरकारी स्कूलों में शिक्षक नहीं, इमारतें जर्जर, डिजिटल सुविधा शून्य। युवा पलायन कर रहे हैं – कोई कौशल केंद्र नहीं।
- पानी, सिंचाई और कृषि: गर्मियों में पानी संकट, बागानों के लिए सिंचाई नहीं – किसान तबाह।
- जिला बनाने की ठगी: 2011 में घोषणा हुई, लेकिन आज तक नहीं। 30 साल की ठगी जारी।
- विधायक की आपसी लड़ाई: चुफाल खुद सरकार पर नाराज – फाइलें अटकने, ब्यूरोक्रेसी पर आरोप। एक वायरल वीडियो में स्थानीय कार्यकर्ता ने विकास पर सवाल किया तो विधायक भड़क गए – “चश्मा लगा लो” वाला मामला प्रसिद्ध।
राजनीतिक संदर्भ और विधायक की विफलता
बिशन सिंह चुफाल 1996 से लगातार विधायक, पूर्व कैबिनेट मंत्री, प्रदेश अध्यक्ष – लेकिन प्रदीप पाल कहते हैं, “लंबा कार्यकाल सिर्फ कुर्सी बचाने के लिए। विकास नहीं, सिर्फ वादे और फोटो सेशन।” हाल में एम्बुलेंस जैसी छोटी सौगातें दीं, लेकिन बुनियादी समस्या बनी हुई। कांग्रेस 2027 चुनावों के लिए इसे बड़ा मुद्दा बना रही है।
कांग्रेस नेता प्रदीप पाल का कहना है कि डीडीहाट में स्वास्थ्य संकट, पिछड़ापन और उपेक्षा जानलेवा साबित हो रही है। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी, एम्बुलेंस अभाव और इंफ्रास्ट्रक्चर की विफलता वास्तविक है। राज्य सरकार 2026 को “निर्णायक वर्ष” कह रही है, लेकिन पहाड़ों में इलाज के अभाव में मौतें जारी हैं। यदि ठोस कदम नहीं उठे – अस्पताल अपग्रेड, डॉक्टर पोस्टिंग, सड़कें – तो जनता और विद्रोह करेगी। विधायक को इस्तीफा देना चाहिए, या जनता 2027 में जवाब देगी। जनता अब झूठे सुरमा नहीं, असली विकास चाहती है!

