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Uttarakhand STF ने पकड़ा 1 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी का आरोपी

Uttarakhand Stf

Uttarakhand STF ने निवेश एप ASKICPRO के नाम पर चल रहे बड़े साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस फर्जी एप के जरिए लोगों को कम समय में ज्यादा मुनाफे का लालच देकर करीब 1 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई।

ऐसे फंसाए जाते थे निवेशक

जांच में पता चला है कि आरोपी सोशल मीडिया विज्ञापनों, टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से लोगों से संपर्क करता था। ASKICPRO एप को “विश्वसनीय निवेश प्लेटफॉर्म” बताकर शेयर मार्केट और क्रिप्टो ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा दिलाने का दावा किया जाता था। शुरुआत में निवेशकों को छोटे-छोटे रिटर्न दिखाए जाते थे, ताकि उनका भरोसा मजबूत हो सके।

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इसके बाद जब निवेशक बड़ी रकम जमा करते थे तो अचानक एप से निकासी (Withdrawal) बंद कर दी जाती थी और कस्टमर सपोर्ट नंबर भी निष्क्रिय हो जाता था।

उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (Uttarakhand STF)

उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) Uttarakhand Special Task Force उत्तराखंड पुलिस की एक विशेष इकाई है, जिसे संगठित अपराध, साइबर अपराध, मादक पदार्थ तस्करी और अन्य जटिल अपराधों से निपटने के लिए गठित किया गया है। यह राज्य की सबसे विशेषज्ञ जांच और ऑपरेशन एजेंसी मानी जाती है, जो अत्याधुनिक तकनीक और विशेष प्रशिक्षण पर आधारित है।

प्रमुख तथ्य

  • स्थापना वर्ष: 2014
  • मुख्यालय: देहरादून, उत्तराखंड
  • अधीनता: उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक (DGP)
  • मुख्य कार्य: संगठित अपराध, साइबर अपराध, वांछित अपराधी, फर्जीवाड़े की जांच
  • प्रमुख इकाइयाँ: साइबर सेल, नारकोटिक्स यूनिट, ट्रैकिंग सेल

Uttarakhand STF का गठन और उद्देश्य

स्पेशल टास्क फोर्स का गठन उत्तराखंड में तेजी से बढ़ते संगठित अपराध और साइबर अपराध की रोकथाम के लिए किया गया। इसका उद्देश्य उन मामलों की जांच करना है जिनमें स्थानीय थाने या सामान्य पुलिस बल को तकनीकी या समन्वय संबंधी कठिनाइयाँ होती हैं। STF को गुप्त सूचनाओं के संकलन और सटीक कार्रवाई के लिए विशेषाधिकार प्राप्त हैं।

Uttarakhand STF का प्रमुख कार्यक्षेत्र

STF राज्यव्यापी स्तर पर संगठित गिरोहों, मानव तस्करी, वन्यजीव अपराध, साइबर धोखाधड़ी और नशे के कारोबार से संबंधित अपराधों की जांच करती है। यह राज्य की अन्य एजेंसियों तथा केंद्रीय जांच संस्थानों जैसे Central Bureau of Investigation (CBI) और Narcotics Control Bureau के साथ भी समन्वय करती है।

Uttarakhand STF का उल्लेखनीय उपलब्धियाँ

STF ने कई चर्चित मामलों में सफलता पाई है, जैसे अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोहों का भंडाफोड़, फर्जी परीक्षा रैकेट्स का खुलासा और वन्यजीव तस्करी पर बड़ी कार्रवाई। इसके साइबर सेल ने ऑनलाइन ठगी और डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए आम नागरिकों को जागरूक करने वाले अभियान भी चलाए हैं।

Uttarakhand STF का प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकी

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इस बल के कर्मियों को निरंतर तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल ट्रैकिंग, और ड्रोन निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग सिखाया जाता है। STF का ढांचा तेजी से बदलते अपराध परिदृश्य के अनुरूप विकसित किया गया है ताकि राज्य में कानून व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा को सशक्त बनाया जा सके।

Uttarakhand STF की कार्रवाई

उत्तराखंड पुलिस की STF टीम को कई शिकायतें मिलने के बाद तकनीकी जांच शुरू की गई। साइबर ट्रेल, बैंक डिटेल और मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी तक पहुँच बनाई गई। पूछताछ में आरोपी ने कई फर्जी खातों और डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल करने की बात स्वीकार की है। पुलिस ने संबंधित बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है और अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

Uttarakhand STF का तकनीकी जांच से खुला राज

उत्तराखंड पुलिस की STF टीम ने साइबर विशेषज्ञों की मदद से डिजिटल ट्रांजैक्शन का विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम अलग-अलग राज्यों के बैंक खातों और फर्जी कंपनियों के नाम पर खोले गए खातों में ट्रांसफर की गई।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड और कई बैंक पासबुक बरामद किए हैं। साथ ही करोड़ों रुपये के लेन-देन से जुड़े डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं।

अन्य राज्यों से भी जुड़ सकते हैं तार

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STF अधिकारियों के अनुसार, ASKICPRO एप से जुड़े इस गिरोह के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब मनी ट्रेल के आधार पर पूरे नेटवर्क की पहचान करने में जुटी है। जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी संभव है।

Uttarakhand STF की लोगों से अपील

STF ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान एप या लिंक पर निवेश करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच अवश्य करें। अधिक रिटर्न का झांसा, बिना रजिस्ट्रेशन के निवेश प्लेटफॉर्म और फर्जी रिव्यू साइबर ठगी के आम संकेत होते हैं।

साइबर अपराध की शिकायत के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 या आधिकारिक पोर्टल पर तुरंत जानकारी दें। समय पर शिकायत करने से ठगी गई रकम को ट्रेस करने में मदद मिल सकती है।

By Karan

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