देहरादून: महिला क्रिकेट विश्व कप फाइनल में भारत की जीत का जश्न शहर भर में धूमधाम से मनाया गया। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच रोमांचक मुकाबले को देखने के लिए लोग स्टेडियम से लेकर घरों तक उत्साहित नजर आए। जीत का ऐलान होते ही देहरादून की सड़कें जश्न में डूब गईं—आतिशबाजी से आसमान रंगीन हो उठा और लोग नाचते-गाते झूमने लगे। हर कोने में देशभक्ति के नारे गूंजे, और अगले दिन भी लोगों का मन काम पर नहीं, बल्कि इस ऐतिहासिक जीत की चर्चा में लगा रहा।
क्रिकेट का जुनून: दून में बेटियों की जीत पर छाया जश्न का खुमार
देहरादूनवासियों के सिर क्रिकेट का जुनून हमेशा चढ़कर बोलता है, लेकिन जब बात भारतीय बेटियों की हो—to उत्साह सातवें आसमान को छूने लगता है। महिला क्रिकेट विश्व कप का फाइनल रविवार को भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेला गया। इस हाई-वोल्टेज मुकाबले का इंतजार हर किसी को बेसब्री से था।
मैच शुरू होते ही ठप्प हुई जिंदगी
दोपहर बाद जैसे ही मैच शुरू हुआ, घर हो या बाजार, निजी दफ्तर हो या चाय की दुकान—हर जगह लोग टीवी से चिपक गए। सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को धूल चटाने के बाद फाइनल में पहुंची ‘हरमनप्रीत सेना’ पर हर दूनवासी का भरोसा कायम था कि साउथ अफ्रीका को भी करारी शिकस्त मिलेगी। और हुआ भी यही!
देर रात ट्रॉफी भारत की, दून की सड़कें जश्न में डूबीं
रात 12 बजते-बजते जैसे ही भारतीय महिला टीम ने विश्व कप ट्रॉफी पर कब्जा जमाया, देहरादून जश्न के रंग में रंग गया। घंटाघर से लेकर राजपुर रोड, प्रिंस चौक तक आतिशबाजी का दौर शुरू हो गया। आसमान रॉकेटों और रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगा उठा। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं—सब सड़कों पर उतर आए। तिरंगा लहराते, नारे लगाते लोग झूमते नजर आए।
पुलिस भी रही अलर्ट, राष्ट्रपति के दौरे के चलते बढ़ी सतर्कता
जश्न के इस उन्माद में खलल न पड़े, इसके लिए पुलिस ने भारी तादाद में बल तैनात किया। वजह थी—शहर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दौरा। भीड़ को काबू में रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए। फिर भी, जश्न का जोश कम नहीं हुआ।
हर कोई ले रहा था मैच का लुत्फ
मुंबई में स्टेडियम भरा था तो दून में भी उत्साह की कमी नहीं थी। साउथ अफ्रीका की बल्लेबाजी के दौरान हर गेंद पर सांसें थमती रहीं। बीच में मैच फंसा तो चेहरे लटक गए, लेकिन जैसे ही भारत ने पलड़ा भारी किया—खुशी का ठिकाना न रहा। जीत की औपचारिकता पूरी होते ही आतिशबाजी का सिलसिला करीब आधे घंटे तक चला।
सोमवार को भी काम पर नहीं लगा मन
जश्न का असर इतना गहरा था कि सोमवार सुबह भी लोग मैच की चर्चा में डूबे रहे। निजी दफ्तरों में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी काम के बीच अपडेट लेते रहे। जहां टीवी था, वहां काम ठप—सबकी नजरें स्क्रीन पर। जीत का नशा पूरे शहर पर छाया रहा।
देहरादून ने साबित कर दिया—जब बेटियां जीतती हैं, तो जश्न सिर्फ स्टेडियम तक सीमित नहीं रहता, पूरा शहर मैदान बन जाता है!
