ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बन चुका है जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है। यह कानून 10 दिसंबर 2025 से लागू हो जाएगा। इसके तहत फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, स्नैपचैट, रेडिट, थ्रेड्स, यूजूब, एक्स (पूर्व ट्विटर), ट्विच और किक जैसे प्लेटफॉर्म्स को “उचित कदम” उठाने होंगे ताकि 16 साल से कम उम्र के बच्चे इन पर अकाउंट न बना सकें या मौजूदा अकाउंट्स को डिएक्टिवेट कर सकें। माता-पिता की सहमति भी मान्य नहीं होगी।
मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी) ने 19 नवंबर 2025 को घोषणा की कि वह 4 दिसंबर से 16 साल से कम उम्र के ऑस्ट्रेलियाई यूजर्स के अकाउंट्स बंद करना शुरू कर देगी। कंपनी ने यूजर्स को ईमेल, एसएमएस और ऐप नोटिफिकेशन के जरिए चेतावनी दी है। ट्विच को 20 नवंबर को प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया, जबकि पिंटरेस्ट को बाहर रखा गया क्योंकि यह मुख्य रूप से सामाजिक इंटरैक्शन पर आधारित नहीं है।
सरकार का कहना है कि यह कदम बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बचाने के लिए जरूरी है, क्योंकि सोशल मीडिया पर साइबरबुलिंग, हानिकारक कंटेंट और ऑनलाइन खतरे बढ़ रहे हैं। उल्लंघन पर प्लेटफॉर्म्स को 50 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 33 मिलियन यूएस डॉलर) तक का जुर्माना लग सकता है। बच्चों या माता-पिता पर कोई सजा नहीं होगी। हालांकि, आलोचक गोपनीयता चिंताओं और डेटा संग्रह के जोखिमों की ओर इशारा कर रहे हैं। एक सर्वे के अनुसार, 77% ऑस्ट्रेलियाई माता-पिता इसका समर्थन करते हैं।
यूथूब किड्स, व्हाट्सऐप और गूगल क्लासरूम जैसे एजुकेशनल ऐप्स इससे बाहर हैं। रोब्लॉक्स ने भी स्वेच्छा से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए चैट फीचर्स पर उम्र सत्यापन लागू किया है।
अन्य देशों में सोशल मीडिया प्रतिबंध या प्रतिबंध: समाचार अपडेट
ऑस्ट्रेलिया के इस कदम से प्रेरित होकर कई देश बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर सख्ती बढ़ा रहे हैं। यहां प्रमुख अपडेट्स हैं:
- फ्रांस: 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध की सिफारिश की गई है। 15-18 साल के किशोरों के लिए रात्रि कर्फ्यू (रात में एक्सेस बंद) लागू है। मई 2025 में फ्रांस और स्पेन ने यूरोपीय संघ (ईयू) में 15 साल से कम उम्र के लिए पूर्ण प्रतिबंध की पहल की।
- नॉर्वे: 13 साल से 15 साल तक की उम्र सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव है। जून 2025 में प्रधानमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया “बच्चों के दिमाग के खिलाफ” है।
- डेनमार्क: 15 साल से कम उम्र के लिए प्रतिबंध की योजना।
- स्पेन: 16 साल से कम उम्र के लिए माता-पिता की अनुमति अनिवार्य। संसद में ड्राफ्ट लॉ भेजा गया है।
- ब्राजील: सितंबर 2025 में कानून पारित, 16 साल से कम उम्र के अकाउंट्स को माता-पिता से लिंक करना अनिवार्य। 12-18 साल के लिए ऐप डाउनलोड पर सहमति जरूरी।
- पाकिस्तान: जुलाई 2025 में सीनेट बिल पेश, 16 साल से कम उम्र के लिए प्रतिबंध और उम्र सत्यापन।
- न्यूजीलैंड: मई 2025 में बिल पेश, 16 साल से कम उम्र के लिए प्रतिबंध (ऑस्ट्रेलिया से प्रेरित)।
- जापान: आंशिक प्रतिबंध और उम्र-आधारित प्रतिबंध लागू।
- यूएस (यूटा राज्य): समान कानून को अदालत ने असंवैधानिक घोषित किया।
ये कदम मानसिक स्वास्थ्य, साइबरबुलिंग और गोपनीयता जोखिमों से निपटने के लिए हैं। वैश्विक सर्वे में 30 देशों में बहुमत (खासकर 14 साल से कम के लिए) प्रतिबंध का समर्थन करता है।

भारत में सोशल मीडिया पर बच्चों के लिए प्रावधान
भारत में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) एक्ट 2023 के ड्राफ्ट नियमों (जनवरी 2025 में जारी) के तहत सख्त प्रावधान हैं। मुख्य बिंदु:
- माता-पिता की सहमति अनिवार्य: 18 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया अकाउंट (जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक, टिकटॉक) नहीं बना सकेंगे बिना “सत्यापित माता-पिता सहमति” के। डेटा फिड्यूशरी (प्लेटफॉर्म्स) को यह सुनिश्चित करना होगा कि सहमति वयस्क माता-पिता से हो और पहचान सत्यापित हो (जैसे आधार या सरकारी टोकन से)।
- पीओसीएसओ एक्ट 2012: बच्चों (18 साल से कम) को ऑनलाइन यौन शोषण, साइबरबुलिंग और हानिकारक कंटेंट से बचाता है। सेक्शन 15 के तहत चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखना भी अपराध है। प्लेटफॉर्म्स को ऐसी सामग्री रिपोर्ट करनी होगी, वरना आईटी एक्ट की “सेफ हार्बर” सुरक्षा खो देंगे।
- आईटी एक्ट 2000: सेक्शन 67 पर अश्लील सामग्री प्रसार पर 5 साल की सजा। सेक्शन 66ई गोपनीयता उल्लंघन पर। मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर सख्ती बरतने का आदेश दिया।
- अन्य: ड्राफ्ट नियमों में डेटा उल्लंघन पर 72 घंटे में रिपोर्टिंग और निष्क्रिय अकाउंट्स का 3 साल बाद डिलीट होना शामिल। ई-कॉमर्स और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स भी प्रभावित। उल्लंघन पर 250 करोड़ तक जुर्माना।
ये नियम फरवरी 2025 तक सार्वजनिक सुझावों के बाद अंतिम होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में 16-18 साल के लिए उम्र सत्यापन की सिफारिश की, लेकिन संसद पर छोड़ा।
भारत में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर नियमन की आवश्यकता
भारत में 46 करोड़ सोशल मीडिया यूजर्स हैं, जिनमें से बड़ी संख्या बच्चे हैं। 18 साल से कम उम्र के लिए सख्त नियमन जरूरी है क्योंकि:
- मानसिक स्वास्थ्य जोखिम: साइबरबुलिंग, बॉडी शेमिंग और एडिक्शन से अवसाद, चिंता और आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि अत्यधिक उपयोग सीखने और भावनात्मक विकास को प्रभावित करता है।
- गोपनीयता और शोषण: बच्चे आसानी से व्यक्तिगत डेटा शेयर करते हैं, जो साइबरस्टॉकिंग या यौन शोषण का शिकार बनाता है। पीओसीएसओ के तहत ऑनलाइन सीएसएएम (चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मटेरियल) का प्रसार आम है।
- अनियंत्रित पहुंच: प्लेटफॉर्म्स पर उम्र सत्यापन कमजोर है, जिससे 13 साल से कम बच्चे भी अकाउंट बनाते हैं। डीपीडीपी नियम माता-पिता को नियंत्रण देकर जिम्मेदारी बढ़ाएंगे।
- डिजिटल साक्षरता की कमी: माता-पिता और बच्चों को शिक्षा की जरूरत है। नियमों के साथ जागरूकता अभियान, स्कूल कर्फ्यू और एआई-आधारित उम्र अनुमान उपयोगी होंगे।
वैश्विक ट्रेंड्स (जैसे ऑस्ट्रेलिया) से सीखते हुए, भारत को पूर्ण प्रतिबंध की बजाय सहमति-आधारित मॉडल अपनाना चाहिए, जो बच्चों को सुरक्षित रखते हुए डिजिटल लाभ भी दे। यह परिवार मूल्यों के अनुरूप है और शोषण रोक सकता है।
