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आदि कैलास, ऊं पर्वत पर बर्फबारी, 18 फरवरी पिथौरागढ़ में ठंड बढ़ी

आदि कैलास, ऊं पर्वत

पिथौरागढ़ जिले में आदि कैलास, ऊं पर्वत में मौसम ने अचानक करवट ली है। पिछले कई दिनों से पड़ रही तेज धूप के बाद बुधवार को आसमान बादलों से ढका रहा। ऊंचाई वाले इलाकों में आदि कैलास और ऊं पर्वत क्षेत्र में हल्का हिमपात दर्ज किया गया, जबकि मुनस्यारी की ऊंची चोटियां भी बर्फ की सफेद चादर में ढक गईं। निचली घाटियों में दिनभर बादल छाए रहने और ठंडी हवाएं चलने से तापमान में गिरावट आई, जिससे लोगों को फिर से गर्म कपड़े निकालने पड़े।

धारचूला तहसील के अंतर्गत स्थित आदि कैलास और ऊं पर्वत क्षेत्र में दोपहर बाद हल्का हिमपात हुआ। ऊंचाई पर बर्फबारी शुरू होते ही तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज की गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, मौसम को देखते हुए रात में तेज हिमपात की भी संभावना बनी हुई है।

आदि कैलास, ऊं पर्वत

आदि कैलास और ऊं पर्वत धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थल हैं। यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ट्रैकिंग प्रेमी पहुंचते हैं। बर्फबारी से इन क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता और भी निखर गई है, लेकिन साथ ही ठंड का असर भी बढ़ गया है।

मुनस्यारी तहसील के अंतर्गत पंचाचूली, हंसालिंग और राजरंभा जैसी ऊंची चोटियों पर भी बर्फबारी दर्ज की गई। पंचाचूली की बर्फ से ढकी चोटियां पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई हैं। हालांकि मुख्यालय और निचले इलाकों में बारिश नहीं होने से लोगों को मायूसी हाथ लगी।

मुनस्यारी में दिनभर ठंडी हवाएं चलती रहीं, जिससे ठिठुरन बढ़ गई। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अचानक बढ़ी ठंड से बाजारों में ऊनी कपड़ों की मांग फिर से बढ़ गई है।

निचले इलाकों में बादल, तापमान में गिरावट

जिला मुख्यालय सहित डीडीहाट, धारचूला, बेरीनाग और गंगोलीहाट में दिनभर बादल छाए रहे। दोपहर बाद बादल घने हुए, जिससे बारिश की उम्मीद जगी, लेकिन वर्षा नहीं हो सकी। ठंडी हवाओं के कारण तापमान में गिरावट आई और सुबह-शाम सर्दी का असर अधिक महसूस किया गया।

कई दिनों से पड़ रही तेज धूप के बाद आए इस बदलाव ने मौसम को सुहावना तो बना दिया, लेकिन बारिश न होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।


बारिश न होने से किसान निराश

हालांकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात हुआ, लेकिन निचली घाटियों में बारिश नहीं हुई। इससे खेतों में नमी की कमी बनी हुई है। गेहूं और अन्य रबी फसलों के लिए इस समय हल्की बारिश लाभदायक होती, लेकिन बादल बिना बरसे लौट गए।

किसानों का कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। साथ ही, जंगलों में नमी की कमी से आग लगने का खतरा भी बढ़ गया है।

जंगलों में आग का बढ़ता खतरा

बारिश न होने और शुष्क मौसम के कारण जंगलों में आग की घटनाओं की आशंका बढ़ रही है। पिछले वर्षों में भी इस समय आग की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। प्रशासन ने वन विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय लोगों से भी अपील की गई है कि जंगलों में लापरवाही न बरतें।


धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों पर असर

आदि कैलास, ऊं पर्वत

आदि कैलास और ऊं पर्वत क्षेत्र में हुई बर्फबारी से एक ओर जहां प्राकृतिक सौंदर्य में वृद्धि हुई है, वहीं दूसरी ओर मार्गों पर फिसलन बढ़ने की संभावना भी है। प्रशासन ने यात्रियों और पर्यटकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

मौसम विभाग के अनुसार, यदि तापमान में और गिरावट आती है तो अगले 24 घंटों में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात जारी रह सकता है। इससे पर्यटन गतिविधियों पर अस्थायी प्रभाव पड़ सकता है।


लोगों ने फिर निकाले गर्म कपड़े

आदि कैलास, ऊं पर्वत

अचानक बदले मौसम ने लोगों की दिनचर्या पर असर डाला है। कई दिनों से गर्मी जैसी स्थिति के बाद अब ठंड लौट आई है। सुबह और शाम के समय लोग स्वेटर, जैकेट और शॉल पहनकर बाहर निकल रहे हैं। गुंजी गांव सहित कई सीमावर्ती क्षेत्रों में तेज हवाओं ने ठंड को और बढ़ा दिया है।


आगे कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहता है तो आने वाले दिनों में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात और निचले इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। फिलहाल, आदि कैलास और ऊं पर्वत क्षेत्र में ताजा बर्फबारी ने सर्दी का अहसास फिर से बढ़ा दिया है।


निष्कर्ष

पिथौरागढ़ जिले में मौसम का यह बदलाव एक ओर जहां पहाड़ों की खूबसूरती बढ़ा रहा है, वहीं किसानों और वन विभाग की चिंताओं को भी बढ़ा रहा है। आदि कैलास और ऊं पर्वत पर हुई बर्फबारी से ठंड बढ़ी है, लेकिन बारिश के अभाव में निचले इलाकों में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। अब सभी की नजरें आगामी मौसम पूर्वानुमान पर टिकी हैं।

By Karan

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