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रानीबाग मंदिर अतिक्रमण विवाद: पुलिस ने मंदिर बचाने उतरे पहाड़ी लोगों को जबरन उठाया, पहाड़ी और कत्यूरी समाज में जबरदस्त आक्रोश

मुख्यमंत्री धामी तक पहुंची शिकायत, अब सख्त कार्रवाई की मांग तेज; मंदिर बचाने पहुंचे लोगों की हिरासत पर उठे सवाल

हल्द्वानी/रानीबाग, 29 अगस्त।
रानीबाग स्थित ऐतिहासिक चित्रशिला घाट मंदिर को लेकर चल रहा विवाद शनिवार को पुलिस कार्रवाई के बाद और गहरा गया है। मंदिर परिसर के पीछे कथित अवैध निर्माण और कब्जे के विरोध में पहुंचे पहाड़ी समाज एवं पहाड़ी आर्मी के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुए विवाद के बाद पहाड़ी आर्मी के अध्यक्ष हरीश रावत समेत पांच-छह लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई है।

इस कार्रवाई के बाद कत्यूरी समाज में जबरदस्त आक्रोश है। समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रशासन को मंदिर और कथित निर्माण की वैधता की जांच करने के बजाय मंदिर की रक्षा की मांग कर रहे लोगों पर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए थी। इसके बजाय पूलिस ने मंदिर समिति एवं कत्यूरी समाज के सम्मानित लोगों को ही हिरासत में ले लिया जिसमें कुछ महिलाएं भी शामिल थी।

मुख्यमंत्री धामी तक पहुंच चुकी है शिकायत

रानीबाग विवाद अब केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रहा है। इससे पहले कत्यूरी समाज और पहाड़ी समाज की ओर से मामले को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष ले जाने की तैयारी की गई थी। 20 अगस्त की रिपोर्ट में भी प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्यमंत्री से मुलाकात कर मामले में कार्रवाई की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

समाज का कहना है कि मुख्यमंत्री स्तर तक शिकायत पहुंचने के बावजूद यदि विवादित निर्माण और कथित अतिक्रमण पर निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई और आज विरोध करने पहुंचे लोगों को हिरासत में लिया गया, तो इससे समाज में स्वाभाविक रूप से आक्रोश बढ़ा है।

मंदिर समिति और कत्यूरी समाज के लोगों का स्पष्ट तौर पर कहना है कि अतिक्रमणकारी बाहरी प्रदेशो के लोग हैं जिन्हें कुछ स्थानीय लोग शह दे रहे हैं और मंदिर की भूमि कब्जाने पर उनकी नज़र हैं और आज मंदिर में अतिक्रमण का विरोध करने के दौरान उनके द्वारा महिला पुलिस पर पत्थर फेंके गए किंतु राजनीतिक दबाव एवं मजबूरी में में पुलिस ने अतिक्रमण का विरोध करने वालों पर ही कार्यवाही कर दी ।

“मुख्यमंत्री स्वयं कत्यूरी विरासत से संबंध रखते हैं”

कत्यूरी समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं उत्तराखंड की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को लगातार महत्व देते रहे हैं। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री ने कत्यूरी काल से जुड़े कपिलेश्वर , केदारनाथ, बद्रीनाथ और बैजनाथ जैसे प्राचीन मंदिरों की धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्ता को सार्वजनिक रूप से रेखांकित किया है। मुख्यमंत्री स्वयं कत्यूरी देवताओं के उपासक भी हैं, और कत्यूरी विरासत का हिस्सा हैं।

इसी आधार पर समाज की मांग है कि रानीबाग चित्रशिला घाट से जुड़े विवाद को भी केवल कानून-व्यवस्था का मामला न मानकर ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के विषय के रूप में देखा जाए।

कत्यूरी समाज का कहना है कि मुख्यमंत्री यदि कत्यूरी विरासत को संरक्षित करने की बात करते हैं तो रानीबाग मामले में भी प्रशासन को स्पष्ट और निष्पक्ष कार्रवाई का संदेश देना चाहिए।

“मंदिर बचाने वालों पर कार्रवाई क्यों?”

समाज का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मंदिर के आसपास कथित अवैध निर्माण अथवा अतिक्रमण की शिकायत पहले से प्रशासन के पास थी, और प्रशासन द्वारा भवन को पूर्व में अवैध घोषित किया गया था तो उसकी जांच और कार्रवाई की स्थिति क्या है?

समाज की मांग है कि प्रशासन सार्वजनिक रूप से बताए—

  • विवादित भूमि का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है?
  • क्या वहां निर्माण के लिए वैध अनुमति ली गई थी?
  • निर्माण का नक्शा और संबंधित विभागों की स्वीकृति क्या है?
  • राजस्व अभिलेखों में भूमि की स्थिति क्या दर्ज है?
  • पूर्व में की गई शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई?
  • हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ किन धाराओं में कार्रवाई की गई?
  • उन्हें किस स्थान पर रखा गया और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है?

हरीश रावत, सुभाष कांडपाल समेत लोगों की हिरासत पर आक्रोश

आज की घटना में सम्मानित जन हरीश रावत एवं सुभाष कांडपाल समेत पांच-छह लोगों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की पुष्टि मीडिया रिपोर्ट में हुई है। पुलिस का कहना है कि मौके पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया और पूरे मामले की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं समाज का आरोप है कि मंदिर और कथित अतिक्रमण के मुद्दे को उठाने वाले लोगों पर कार्रवाई करके मूल विवाद से ध्यान नहीं हटाया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया और समाज के बीच सुभाष कांडपाल समेत कुछ अन्य लोगों को बगैर कारण पुलिस द्वारा उठाए जाने पर सवाल उठाए जा रहे है और सूचना के अनुसार रामनगर कोतवाली में भारी भीड़ जमा हो रही है।

मुख्यमंत्री से सख्त कार्रवाई की मांग

कत्यूरी समाज ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग की है कि मामले में तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यदि जांच में कथित अवैध निर्माण, अतिक्रमण या किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ बिना राजनीतिक दबाव के सख्त कार्रवाई की जाए।

साथ ही समाज चाहता है कि आज हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति स्पष्ट की जाए और अवैध कार्यवाही करने वाले पुलिस कर्मियों पर कार्यवाही की जाय।

“एक पक्ष पर कार्रवाई नहीं, पूरे मामले की जांच हो”

समाज का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन उसी के साथ शिकायत के मूल कारण की जांच करना भी जरूरी है। यदि निर्माण वैध है तो प्रशासन दस्तावेज सामने रखे और यदि अवैध है तो नियमानुसार कार्रवाई करे।

रानीबाग विवाद अब प्रशासन के लिए भी एक बड़ी परीक्षा बन गया है। एक ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय समाज की धार्मिक एवं सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़े आरोप हैं।

कत्यूरी समाज का स्पष्ट कहना है कि वह किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि मंदिर, आस्था और ऐतिहासिक विरासत की सुरक्षा के लिए आवाज उठा रहा है। लेकिन पुलिस द्वारा निर्दोष व्यक्तियों की गिरफ्तारी से अब आक्रोश उठ खड़ा हुआ है। सोशल मीडिया में पुलिस और संबंधित नेताओं के खिलाफ कार्यवाही की आवाजें उठ रही हैं, जिसे देखकर लग रहा है कि इस मुद्दे ने बड़ा रूप ले लिया है।

अब समाज की निगाह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। लोगों की मांग है कि मुख्यमंत्री स्वयं मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच, कथित अतिक्रमण की जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें।

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