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युवाओं में बढ़ते मानसिक रोग: क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

युवा मन पर बढ़ता संकट: बदलती जीवनशैली, सोशल मीडिया और गलत खानपान बना रहे जिम्मेदार – विशेषज्ञ से जानें

आज की तेज रफ्तार वाली जिंदगी में युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य गंभीर खतरे में है। बदलती जीवनशैली, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, अनियमित नींद और गलत खानपान जैसे कारक युवाओं को तनाव, अवसाद और चिड़चिड़ेपन की गिरफ्त में धकेल रहे हैं। हल्द्वानी के सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसटीएच) के मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना दर्जनों युवा इन समस्याओं को लेकर पहुंच रहे हैं।

ओपीडी में बढ़ते युवा मरीज

अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. निकिता देऊपा बताती हैं कि रोजाना 60 से 70 मरीज परामर्श के लिए आते हैं, जिनमें 25 से 30 युवा (आयु वर्ग 18-35 वर्ष) तनाव, अवसाद, चिंता और चिडचिड़ापन की शिकायत लेकर पहुंचते हैं। डॉ. देऊपा कहती हैं,

25 से 35 वर्ष के युवा सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। उनके जीवन में एक साथ कई दबाव चल रहे हैं – रोजगार की अनिश्चितता, रिलेशनशिप में उतार-चढ़ाव, परिवार की जिम्मेदारियां और सोशल मीडिया की चकाचौंध भरी दुनिया का दबाव।

सोशल मीडिया: दिखावा vs वास्तविकता

सोशल मीडिया पर परफेक्ट लाइफ की तस्वीरें देखकर युवा खुद को दूसरों से तुलना करने लगते हैं। FOMO (Fear of Missing Out) और सोशल कम्पैरिजन की भावना उन्हें अंदर से खोखला कर रही है। डॉ. देऊपा बताती हैं,

रात भर स्क्रॉलिंग, नीली रोशनी का असर, नींद की कमी – ये सब मिलकर डोपामाइन लूप बनाते हैं, जो बाद में अवसाद और बेचैनी को जन्म देता है।”

खानपान और नींद का सीधा असर

क्या कहते हैं आंकड़े?

विशेषज्ञ की सलाह: क्या करें युवा?

डॉ. निकिता देऊपा सुझाव देती हैं:

  1. स्क्रीन टाइम सीमित करें – रात 10 बजे के बाद फोन बंद।
  2. नियमित व्यायाम – रोज 30 मिनट टहलना या योग।
  3. स्वस्थ आहार – हरी सब्जियां, फल, नट्स, पानी की मात्रा बढ़ाएं।
  4. दोस्तों-परिवार से खुलकर बात करें – अकेलापन सबसे बड़ा दुश्मन है।
  5. समय पर मदद लें – छोटी सी चिंता भी बड़ा रूप ले सकती है।

अंत में…

“मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना सबसे महंगी गलती है,” डॉ. देऊपा चेतावनी देती हैं। युवा पीढ़ी ही देश का भविष्य है – अगर उनका मन स्वस्थ नहीं रहा, तो सपने कैसे पूरे होंगे?

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