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उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट: देहरादून सहित 8 जिलों में हाई रिस्क

उत्तराखंड में मानसून ने फिर से अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल, चंपावत और बागेश्वर सहित आठ जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। यह अलर्ट अगले 24-48 घंटों के लिए है, जिसमें 11-16 सितंबर तक भारी से अति भारी वर्षा (21 सेंटीमीटर से अधिक), गरज-चमक, बिजली गिरने और 40-60 किमी/घंटा की तेज हवाओं की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून अनियमित हो रहा है, और अगस्त में सामान्य से 8% अधिक बारिश के बाद सितंबर में यह तीव्रता बढ़ गई है।

अलर्ट प्रभावित जिलों का विवरण

आईएमडी की रिपोर्ट के अनुसार, रेड अलर्ट वाले जिलों में संभावित प्रभाव इस प्रकार हैं:

पिछले 48 घंटों में राज्य में 50-100 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 20% अधिक है। 13-14 सितंबर को हिमाचल प्रदेश से सटे क्षेत्रों में और तीव्रता बढ़ सकती है।

स्कूल बंद, प्रशासन की सतर्कता

चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधम सिंह नगर में कक्षा 1 से 12 तक सभी सरकारी-निजी स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र और कोचिंग संस्थान 12 सितंबर तक बंद कर दिए गए हैं। जिला मजिस्ट्रेटों ने आदेश जारी कर कहा, “भारी वर्षा से भूस्खलन, बाढ़ और दुर्घटनाओं की आशंका है। बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता।” मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को हाई अलर्ट पर रखा। उन्होंने कहा, “डबल इंजन सरकार हर संभावित खतरे से निपटने को तैयार है। 112 हेल्पलाइन पर तुरंत संपर्क करें।”

हाल की तबाही और सावधानियां

पिछले सप्ताह की बारिश ने उत्तरकाशी में 20 मीटर सड़क धंसाव, चमोली में 100 से अधिक मार्ग अवरुद्ध और बागेश्वर में घरों को नुकसान पहुंचाया था। अब तक 5 लोग लापता और 2 की मौत हो चुकी है। आईएमडी ने चेतावनी दी कि 11-16 सितंबर तक देशभर में (यूपी, बिहार, एमपी सहित) भारी बारिश का सिलसिला चलेगा, लेकिन उत्तराखंड में जोखिम सबसे अधिक।

लोगों से अपील:

यूएसडीएमए ने 50 विशेषज्ञ टीमों को तैनात करने का ऐलान किया है, जो जोखिम वाले क्षेत्रों का सर्वे करेंगी। यदि बारिश जारी रही, तो और जिलों में अलर्ट बढ़ सकता है। स्थानीय निवासी अब मौसम ऐप और सोशल मीडिया पर अपडेट फॉलो कर रहे हैं। यह मौसम न केवल राहत कार्यों को प्रभावित करेगा, बल्कि कृषि, पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक असर डालेगा।

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