अंतरिक्ष, एआई और ग्रीन टेक्नोलॉजी से जुड़ी देश की 20 प्रमुख और बड़ी खबरें यहाँ प्रस्तुत हैं:
🌌 अंतरिक्ष एवं खगोल विज्ञान (Space & Astronomy)
- हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन की शुरुआत (Green Railways): भारतीय रेलवे ने देश की पहली हाइड्रोजन-संचालित पैसेंजर ट्रेन सेवा (हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर) शुरू की। हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिश्रण से चलने वाली यह ट्रेन शून्य कार्बन उत्सर्जन के साथ हरित ऊर्जा क्रांति का नया अध्याय है।
- गगनयान मिशन (Gaganyaan) का अंतिम चरण: भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन ‘गगनयान’ के लिए आवश्यक लॉन्च सिस्टम, एस्ट्रोनॉट कैप्सूल और क्रू एस्केप इंफ्रास्ट्रक्चर की परीक्षण प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं।
- स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 रोवर लॉन्च: भारत के प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप ‘Skyroot Aerospace’ ने विक्रम-1 (Vikram-1) रॉकेट की सफल कक्षीय उड़ान (Orbital Launch) पूरी की, जिसे भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की ऐतिहासिक सफलता माना जा रहा है।
- सूर्य के ऊपरी वायुमंडल में तेज़ी से घूर्णन की खोज: भारतीय वैज्ञानिकों (IIA/DST) ने अध्ययन में पाया कि सूर्य की सतह की तुलना में उसका ऊपरी वायुमंडल (Corona) अधिक गति से घूमता है। इस खोज से अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान में बड़ी मदद मिलेगी।
- मछुआरों की सुरक्षा के लिए ISRO ट्रांसपोंडर: भारतीय नौकाओं और मछुआरों की सुरक्षा के लिए ISRO द्वारा विकसित संचार ट्रांसपोंडर (VCSS) को देश भर की 1 लाख समुद्री नौकाओं पर लगाने की योजना को अंतिम मंजूरी मिल गई है।
- हनले (Hanle) में हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप के 25 वर्ष: लद्दाख के Hanle में स्थित भारत के ‘हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप’ ने संचालन के 25 वर्ष पूरे किए। इसने नियर-अर्थ एस्टेरॉयड और सुपरनोवा शोध में महत्वपूर्ण डेटा दिया है।
🤖 एआई, डिजिटल और टेलीकॉम (AI, Telecom & Digital Tech)
- Ministry of Ayush और IndiaAI मिशन में करार: आयुष मंत्रालय और MeitY के ‘IndiaAI’ मिशन ने पारंपरिक चिकित्सा, जड़ी-बूटियों के अनुसंधान और डिजिटल हेल्थकेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को एकीकृत करने के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए।
- ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ): मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भारत का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन स्थापित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य 5G/6G उपकरण, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर का घरेलू निर्माण बढ़ाना है।
- AI आधारित साइबर डिफेंस फ्रेमवर्क: केंद्र सरकार ने बढ़ते AI आधारित साइबर हमलों से निपटने के लिए नया एआई-पावर्ड साइबर सुरक्षा ढांचा और रीयल-टाइम थ्रेट इंटेलिजेंस नेटवर्क तैनात किया है।
- Bharat 6G Alliance और 1 अरब 5G यूज़र्स का लक्ष्य: भारत में रिकॉर्ड समय में 500 मिलियन 5G यूज़र्स जोड़ने के बाद सरकार ने भारत 6G एलायंस के तहत अगली पीढ़ी के 6G नेटवर्क के स्वदेशी पेटेंट पर काम तेज़ कर दिया है।
- MyGov प्लेटफॉर्म पर 6.32 करोड़ नागरिक जुड़े: नीति निर्माण और ई-गवर्नेंस में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए डिजिटल इंडिया का MyGov पोर्टल 6.32 करोड़ पंजीकृत उपयोगकर्ताओं के मील के पत्थर तक पहुँचा।
🔋 नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर व सामग्री विज्ञान (Clean Energy & Materials)
- इलेक्ट्रिकली रीचार्जिंग ‘जिंक-एयर’ बैटरी (Zinc-Air Battery): भारतीय शोधकर्ताओं ने पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरी के विकल्प के रूप में सस्ती और टिकाऊ रीचार्ज होने वाली जिंक-एयर (Zinc-Air) बैटरी तकनीक विकसित की है।
- बोरोफीन-बेस्ड ग्रीन लुब्रिकेंट (Borophene Lubricant): भारतीय वैज्ञानिकों ने बोरोफीन (Borophene) पर आधारित पर्यावरण-अनुकूल लुब्रिकेंट तैयार किया है, जो औद्योगिक मशीनों में घर्षण घटाकर भारी ऊर्जा बचत करेगा।
- स्मार्ट ऑक्साइड ऊर्जा भंडारण तकनीक: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) के शोधकर्ताओं ने एक नया ‘स्मार्ट ऑक्साइड’ पदार्थ तैयार किया है जो ऊर्जा स्टोर करने के साथ-साथ अपनी चार्जिंग स्थिति (Charge Level) को भी प्रदर्शित कर सकता है।
- सेमीकंडक्टर निर्माण में प्रगति: ‘मेक इन इंडिया’ सेमीकंडक्टर मिशन के तहत गुजरात और महाराष्ट्र के नए फैब्रिकेशन (Fab) प्लांट्स में पहली व्यावसायिक चिप टेस्टिंग और पैकेजिंग का काम शुरू हुआ।
🧬 बायोमेडिकल, कृषि और पर्यावरण विज्ञान (Biomed & Environment)
- अमोनिया सेंसिंग वियरेबल डिवाइस: भारतीय शोधकर्ताओं ने जहरीली गैसों से बचाव के लिए एक अत्यधिक संवेदनशील और स्वयं-संचालित (Self-Powered) अमोनिया सेंसर बनाया है, जिसे कपड़ों या वियरेबल गैजेट्स में फिट किया जा सकता है।
- कैनसर डायग्नोस्टिक्स के लिए ‘CLEAR’ तकनीक: बायो-मेडिकल शोधकर्ताओं ने प्रोटीन इमेजिंग के लिए ‘CLEAR’ तकनीक विकसित की है, जिससे शुरुआती चरण में कैंसर और तंत्रिका संबंधी (Neurobiological) बीमारियों का पता लगाया जा सकेगा।
- सुपरएलोय बी-मेटेलिक स्ट्रक्चर breakthrough: एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (3D प्रिंटिंग) के क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकों ने एयरोस्पेस इंजन के लिए सुपर-अलोय मेटल स्ट्रक्चर बनाकर विदेश पर निर्भरता कम की है।
- क्लाइमेट चेंज और हिमालयी वायु गुणवत्ता ट्रैकिंग: वैज्ञानिकों ने पाया कि हिमालयी क्षेत्र में वायु स्वच्छ से प्रदूषित श्रेणी में शिफ्ट हो रही है, जिसके लिए ब्लैक कार्बन और एरोसोल मैपिंग प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।
- खाद्य प्रसंस्करण के लिए ‘हाईब्रिड सोलर ड्रायर’: NIFTEM और BRIC द्वारा विकसित ‘इवेक्यूएटेड ट्यूब सोलर हाइब्रिड ड्रायर’ (Evacuated Tube Solar Hybrid Dryer) तकनीक लॉन्च की गई, जिससे कृषि उपज के प्रसंस्करण में शून्य बिजली खर्च होगी।
