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PLFS रिपोर्ट: कुल बेरोजगारी घटी, लेकिन युवाओं की चिंता बढ़ी

सरकार की Periodic Labour Force Survey (PLFS) के ताजा मासिक बुलेटिन ने भारत के रोजगार बाजार की दोहरी तस्वीर पेश की है। 16 मार्च 2026 को जारी रिपोर्ट (फरवरी 2026 के आंकड़ों पर आधारित) के अनुसार, कुल वयस्क बेरोजगारी दर में मामूली सुधार हुआ है, लेकिन युवा बेरोजगारी में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह डेटा सेवा क्षेत्र और निर्माण में सुधार के साथ-साथ महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को हाइलाइट करता है, परंतु युवाओं, खासकर ग्रामीण युवा महिलाओं की चुनौतियों को भी उजागर करता है।

मुख्य आंकड़े: कुल बेरोजगारी में गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों में कुल बेरोजगारी दर (Unemployment Rate – UR) फरवरी 2026 में 4.9% रही, जो जनवरी 2026 के 5.0% से थोड़ी कम है।

यह गिरावट मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों में सेवा क्षेत्र की मजबूती, निर्माण गतिविधियों में वृद्धि और महिलाओं के कार्यबल में बढ़ते प्रवेश से जुड़ी है।

महिलाओं की श्रम भागीदारी में रिकॉर्ड सुधार

महिलाओं की Labour Force Participation Rate (LFPR) में सकारात्मक बदलाव देखा गया:

महिला बेरोजगारी दर (UR) में भी गिरावट आई – 5.6% से घटकर 5.1%। शहरी महिला UR 9.8% से 8.7% और ग्रामीण 4.3% से 4.0% पर आई। यह सुधार सरकार की स्किल डेवलपमेंट, स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण योजनाओं का परिणाम माना जा रहा है।

युवा बेरोजगारी: चिंता का प्रमुख विषय

15-29 वर्ष आयु वर्ग (युवा) में बेरोजगारी दर जनवरी के 14.7% से बढ़कर फरवरी में 14.8% हो गई – चार महीने का उच्चतम स्तर।

खासकर ग्रामीण युवा महिलाओं (15-29 वर्ष) की बेरोजगारी इस वित्तीय वर्ष में 14.6% पर पहुंच गई, जो अब तक का उच्चतम स्तर है। युवा पुरुषों में UR 13.6% से बढ़कर 13.7%। कुल युवा महिला UR 17.6% रही। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि नए प्रवेश करने वाले युवा अभी भी गुणवत्तापूर्ण नौकरियों की कमी से जूझ रहे हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और बहस

डेटा जारी होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। विपक्ष ने सरकार पर युवा बेरोजगारी को नियंत्रित न करने और नौकरी सृजन के वादे पूरे न करने का आरोप लगाया। कई विपक्षी नेताओं ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “युवा बेरोजगारी बढ़ रही है, ग्रामीण महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हैं – सरकार के ‘अच्छे दिन’ कहां हैं?”

सरकार समर्थकों और कुछ अर्थशास्त्रियों ने सकारात्मक पक्ष पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कुल UR में गिरावट, महिला LFPR में रिकॉर्ड वृद्धि और शहरी क्षेत्रों में सुधार मजबूत आर्थिक रिकवरी दिखाते हैं। अनौपचारिक क्षेत्र को ‘बफर’ बताते हुए कहा गया कि यह ग्रामीण झटकों को सहन करता है। एक सरकारी प्रवक्ता ने टिप्पणी की, “शहरी सेवा और निर्माण में नौकरियां बढ़ रही हैं, महिला भागीदारी 35.3% ऐतिहासिक है। PLFS के मासिक आंकड़े नीति निर्माण को आसान बना रहे हैं।”

विशेषज्ञों की राय और संरचनात्मक चुनौतियां

विशेषज्ञ मानते हैं कि युवा बेरोजगारी संरचनात्मक समस्या है। शिक्षा और कौशल विकास में रोजगार बाजार की मांग से मेल नहीं खा रहा। कई ग्रेजुएट बेरोजगार हैं क्योंकि उनकी स्किल्स इंडस्ट्री की जरूरतों से मेल नहीं खातीं। निर्माण और सेवा क्षेत्र में नौकरियां बढ़ रही हैं, लेकिन ज्यादातर कम वेतन वाली या अस्थायी। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि पर निर्भरता बनी हुई है, जो मौसमी और कम उत्पादक है।

सरकार ने एम्प्लॉयमेंट लिंक्ड इंसेंटिव, स्टार्टअप इंडिया, MGNREGA विस्तार जैसी योजनाएं चलाई हैं, लेकिन आलोचक कहते हैं कि ये पर्याप्त नहीं। अगर युवा बेरोजगारी नहीं घटी तो सामाजिक-आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है।

निष्कर्ष

PLFS फरवरी 2026 रिपोर्ट दोहरी तस्वीर दिखाती है – कुल रोजगार में सुधार, महिलाओं की भागीदारी में उछाल, लेकिन युवाओं में निराशा। भारत की अर्थव्यवस्था तेज बढ़ रही है, लेकिन नौकरियां मात्रा और गुणवत्ता दोनों में बढ़ानी होंगी। राजनीतिक बहस जारी रहेगी, लेकिन समाधान नीतिगत सुधार, निजी निवेश और स्किल मैचिंग से आएगा।

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