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उत्तराखंड में ईमानदार वन अधिकारी राजीव नयन नौटियाल का निलंबन: अवैध खनन के खिलाफ अभियान पर कथित निशाना लगाने पर व्यापक आक्रोश

देहरादून/विकासनगर, 1 जुलाई 2026 — उत्तराखंड में एक ऐसा विकास जो सार्वजनिक बहस और सोशल मीडिया पर व्यापक आक्रोश का कारण बन गया है। चकराता वन प्रभाग (कालसी रेंज) के उप-वन संभाग अधिकारी (एसडीओ) राजीव नयन नौटियाल को राज्य सरकार द्वारा निलंबित कर दिया गया है। आधिकारिक आदेश में कर्तव्य की उपेक्षा और प्रक्रियागत लापरवाहियों का हवाला दिया गया है, लेकिन कई लोग इसे संवेदनशील यमुना और टोंस नदी घाटियों में अवैध खनन के खिलाफ सख्त रुख अपनाने वाले अधिकारी के खिलाफ प्रतिशोध की कार्रवाई मान रहे हैं।

निलंबन के आधिकारिक कारण

अमर उजाला रिपोर्ट और सचिव सी. रविशंकर द्वारा उत्तराखंड सरकारी सेवक (आचरण) नियमों के तहत जारी निलंबन आदेश के अनुसार, नौटियाल पर कई गंभीर आरोप हैं:

मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) ने आरोपों की प्रथम दृष्टया पुष्टि के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की। निलंबन अवधि के दौरान नौटियाल को गढ़वाल के मुख्य वन संरक्षक कार्यालय से संबद्ध किया गया है। चकराता के डीएफओ वैभव कुमार सिंह ने आदेश की पुष्टि की। विभाग ने इस कार्रवाई को जवाबदेही सुनिश्चित करने का कदम बताया है।

पृष्ठभूमि: अधिकारी के अवैध खनन विरोधी प्रयास और पिछले विवाद

नौटियाल का निलंबन कालसी, विकासनगर और चकराता क्षेत्रों में कथित खनन माफिया के साथ उनकी उच्च-प्रोफाइल टकराहट के बीच हुआ है। 2026 की शुरुआत में संरक्षित यमुना नदी तट से सामग्री निकाल रहे डंपर ट्रक को रोकने के प्रयास के दौरान अवैध खनन से जुड़े एक भीड़ ने उन पर हमला किया था। उन्होंने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद क्रॉस-एफआईआर हुईं।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मार्च 2026 में उनके खिलाफ काउंटर केस में गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए पुलिस की आलोचना की और विकासनगर पुलिस स्टेशन के स्टाफ के ट्रांसफर का आदेश दिया। अदालत ने खनन हितों के साथ संभावित सांठगांठ पर सवाल उठाया और पर्यावरण कानूनों को लागू करने वाले अधिकारियों की सुरक्षा पर जोर दिया।

नौटियाल ने खनन माफिया से जान को खतरा बताते हुए पुलिस सुरक्षा भी मांगी थी। पर्यावरण कार्यकर्ताओं सहित जनप्रतिनिधि और सोशल मीडिया यूजर्स ने जंगलों, नदियों और स्थानीय पारिस्थितिकी की रक्षा में उनकी भूमिका को रेखांकित किया है।

जन प्रतिक्रिया और मंत्री सुबोध उनियाल से सवाल

निलंबन ने सोशल मीडिया पर भारी विरोध पैदा कर दिया है। यूजर्स और स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील दून घाटी और शिवालिक foothills में अवैध खनन — जो एक बड़ी समस्या है — के खिलाफ सक्रिय लड़ाई लड़ने वाले अधिकारी को सजा क्यों दी जा रही है, जबकि माफिया बेधड़क काम कर रहा है। कई लोग उन्हें “ईमानदार अधिकारी” बताते हुए “स्पष्टीकरण” नोटिसों और विभागीय जांचों के जरिए उत्पीड़न का शिकार बताया है।

वन एवं पर्यावरण मंत्री सुबोध उनियाल की ओर सीधे अपीलें और आलोचना हो रही है। लोग उनसे मामले की समीक्षा करने और सच्चे अधिकारियों की रक्षा करने की मांग कर रहे हैं। पोस्ट्स में एकजुटता की अपील और जांच में पारदर्शिता की मांग की जा रही है, साथ ही यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या यह कार्रवाई पर्यावरण अपराधों के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करेगी।

व्यापक संदर्भ

उत्तराखंड में अवैध खनन एक लगातार चुनौती बना हुआ है, जो नदी पारिस्थितिकी, भूजल और वन क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है। मैदान पर तैनात अधिकारी अक्सर धमकियों का सामना करते हैं, जबकि विलंबित समर्थन और कथित राजनीतिक-खनन गठजोड़ जैसी सिस्टमिक समस्याएं प्रवर्तन को जटिल बनाती हैं। यह मामला प्रशासनिक अनुशासन और क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण के बीच तनाव को उजागर करता है।

वन विभाग का कहना है कि निलंबन सत्यापित लापरवाहियों पर आधारित है और नौटियाल के अवैध खनन विरोधी कार्यों से जुड़ा नहीं है। हालांकि, समय और जन धारणा ने स्वतंत्र जांच की मांगों को बल दिया है ताकि अधिकारी और पर्यावरण दोनों को न्याय मिल सके।

जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ रही है, सरकार की प्रतिक्रिया, चल रही जांचों और यह देखा जा रहा है कि क्या यह राज्य के जंगलों और नदियों में अवैध गतिविधियों से निपटने वाले अन्य अधिकारियों को हतोत्साहित या प्रोत्साहित करेगा।

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