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चमोली की नेहा नौटियाल की कविता संग्रह ‘चेष्टा: मानव मूल्यों की परख’ हुई विमोचित

जीवन का क्या अर्थ है? इसको जीने का क्या कोई खास तरीका है? क्या पितृसत्ता सबसे उचित है या नारीवाद ही आधुनिक समय की मांग है?
ऐसे कई प्रश्र हम सबके मन में कई बार उठते हैं। ऐसे ही कुछ प्रश्नों पर विचार करती हुई है यह कविता संग्रह– चेष्टा: मानव मूल्यों की परख जिसे नेहा नौटियाल द्वारा लिखा गया है।

क्या मैं इस पृथ्वी पर हूं सर्वश्रेष्ठ प्राणी, या कि मैं हूं बस एक धूल का कण?
क्या भविष्य में जीना ठीक है, या कि जीना हर एक क्षण?
हर अनुभव, हर रिश्ता लेकर आता है एक नया अध्याय।
पर सब कुछ क्षणिक है तो, इन्हें निभाने का क्या है पर्याय?

अपनी इस कविता संग्रह में लेखिका ने मानव मूल्यों को मार्मिक स्पर्श करते हुवे वर्णन किया है, जो मानवीय संवेदनाओं को परिलक्षित करती हैं, जिनको इस कविता संग्रह में पढ़ा जा सकता है। 21 कविताओं की इस पुस्तक में महत्वाकांक्षाएं, आगे बढ़ने की होड़, न्यूनतमवाद, इंटरनेट की दुनिया जैसे वर्तमान समय में प्रासंगिक विषयों का कुशल विश्लेषण किया गया है।

लेखिका चमोली कर्णप्रयाग के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी से गणित में स्नातकोत्तर की डिग्री ली है और हमेशा से ही कविताएं लिखने की शौकीन रही है।उन्हें चीज़े सीखने और जानने का शौक है।
पाठकों को इनकी कविता संग्रह बहुत पसंद आ रही है। इसे फ्लिपकार्ट,ऐमेज़ौन से खरीदा जा सकता है।

यदि आप इस पुस्तक को पढ़ना चाहते हैं तो Amazon और Flipkart पर जाकर ऑर्डर कर सकते है।

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