खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत उत्तराखंड में सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना एक बहु-स्तरीय जिम्मेदारी है।
राज्य सरकार एवं संबंधित मंत्री
राज्य में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की जिम्मेदारी वर्तमान में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पास है। विभाग की जिम्मेदारी उपभोक्ता हितों की रक्षा, विभागीय नीतियों की निगरानी और प्रभावी प्रशासन सुनिश्चित करना है।
मुख्य सचिव एवं विभागीय प्रशासन
विभाग के प्रशासनिक संचालन में प्रमुख सचिव (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति) की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। वे नीतियों के क्रियान्वयन, बजट, प्रशासनिक निर्णयों और विभागीय समन्वय की निगरानी करते हैं।
खाद्य सुरक्षा आयुक्त (Commissioner of Food Safety)
राज्य में खाद्य सुरक्षा कानूनों के प्रवर्तन की सर्वोच्च प्रशासनिक जिम्मेदारी डॉ. आर. राजेश कुमार (आईएएस), खाद्य सुरक्षा आयुक्त के पास है। उनकी जिम्मेदारियों में खाद्य सुरक्षा कानूनों का प्रभावी पालन, निरीक्षण व्यवस्था की निगरानी, राज्यव्यापी अभियान चलाना तथा आवश्यक निर्देश जारी करना शामिल है।
जिलाधिकारी (DM)
प्रत्येक जिले के जिलाधिकारी जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करते हैं। किसी गंभीर खाद्य सुरक्षा घटना की स्थिति में विशेष अभियान चलाना, संयुक्त निरीक्षण कराना और आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
अभिहित अधिकारी (Designated Officer) एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारी
जिले में कार्यरत अभिहित अधिकारी और खाद्य सुरक्षा अधिकारी होटल, रेस्टोरेंट, डेयरी, मिठाई की दुकान, बेकरी, फास्ट फूड प्रतिष्ठानों और खाद्य निर्माण इकाइयों का निरीक्षण करते हैं। नमूने लेना, प्रयोगशाला परीक्षण कराना, नियमों का उल्लंघन मिलने पर विधिक कार्रवाई करना तथा नियमित निगरानी रखना उनके प्रमुख दायित्व हैं।
जवाबदेही कैसे तय होगी?
यदि किसी घटना की जांच में खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन, मिलावट, लापरवाही या निरीक्षण व्यवस्था में कमी सिद्ध होती है, तो कानून के अनुसार संबंधित खाद्य व्यवसायी के साथ-साथ संबंधित प्रशासनिक स्तर पर भी जवाबदेही की समीक्षा की जा सकती है। जांच पूरी होने से पहले किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि को व्यक्तिगत रूप से दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
जनता की अपेक्षा स्पष्ट है—खाद्य सुरक्षा केवल त्योहारों तक सीमित अभियान न रहे, बल्कि पूरे वर्ष नियमित निरीक्षण, सैंपलिंग, प्रयोगशाला परीक्षण और पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

