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नैनी झील में कृत्रिम ऑक्सीजन आपूर्ति चरमराई नई बुलबुला तकनीक बनेगी सहारा

नैनीताल की जीवनदायिनी नैनी झील अपनी गहराइयों में ऑक्सीजन की कमी से जूझ रही है। झील में स्थापित कृत्रिम ऑक्सीजन प्रणाली (एयरेशन सिस्टम) की डिस्क ट्यूबें जर्जर होकर खराब हो चुकी हैं, जिससे घुलित ऑक्सीजन का स्तर लगातार गिर रहा है। इससे मछलियों व अन्य जलीय जीवों का जीवन-चक्र खतरे में पड़ गया है और झील की स्वच्छता भी प्रभावित होने लगी है।

स्थिति गंभीर होने पर प्रमुख सचिव आवास आर. मीनाक्षी सुंदरम ने नैनीताल विकास प्राधिकरण से रिपोर्ट तलब की। प्राधिकरण ने बताया कि एयरेशन सिस्टम की मरम्मत के लिए 5.7 करोड़ रुपये का विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाकर शासन को भेज दी गई है। प्रमुख सचिव के निर्देश पर बजट मंजूरी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि बजट मिलते ही नई डिस्क ट्यूबें लगाई जाएंगी, जिससे झील को फिर से पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने लगेगी।

क्यों बिगड़ गई स्थिति?

नैनी झील में वर्ष 2007 में कृत्रिम एयरेशन सिस्टम लगाया गया था। डिस्क ट्यूबों की उम्र 5 वर्ष तय थी, इसलिए 2012 में मरम्मत आवश्यक थी, लेकिन अब तक पुरानी डिस्क पर ही सप्लाई चल रही है

रिपोर्ट के अनुसार:

क्यों जरूरी है एयरेशन सिस्टम?

फिलहाल झील को 24 घंटे कृत्रिम ऑक्सीजन दी जा रही है, लेकिन खराब तंत्र इसकी क्षमता कम कर रहा है।
घुलित ऑक्सीजन का स्तर झील में 3.8 से 8.8 mg/L पाया गया है, लेकिन तलहटी में यह स्तर सामान्य से बेहद कम है, जो जलीय जीवन के लिए खतरनाक है।

एयरेशन सिस्टम कैसे काम करता है?

नैनीताल विकास प्राधिकरण के सचिव विजयनाथ शुक्ल ने बताया कि सर्वे पूरा हो चुका है और डीपीआर तैयार है। बजट मिलते ही मरम्मत कार्य शुरू होगा, जिससे नैनी झील को नया जीवन मिलने की उम्मीद है।

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