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अल्मोड़ा की बेटी मोना डंगवाल ने किया राज्य का नाम रोशन, कठिन परिश्रम से पास की उत्तराखंड पीसीएस की परीक्षा, जीवन संघर्ष ऐसा जो हर किसी को झकझोंर देगा

देहरादून/अल्मोड़ा02/06/2026– आँसुओं, दर्द, निराशा और अथक संघर्ष की इस लंबी दास्ताँ को आखिरकार सफलता का सूरज नसीब हुआ है। अल्मोड़ा जिले के मझेड़ा (भिकियासैन) की मोना डंगवाल ने जीवन की सबसे कठिन चुनौतियों को रोते हुए, लड़ते हुए और कभी हार न मानते हुए पार किया। बहुत लंबे संघर्ष के बाद उन्होंने UKPSC Upper PCS 2024 परीक्षा में STO (State Tax Officer) पद पर चयनित होकर न सिर्फ अपना सपना साकार किया, बल्कि परिवार के अटूट समर्थन से मिली इस सफलता ने हिम्मत की नई मिसाल पूरे उत्तराखंड के सामने रख दी है।

पिता की हत्या का घाव और न्याय की अनथक लड़ाई

साल 2005। मोना के पिता स्वर्गीय श्री सुभाष चंद्र की निर्मम हत्या कर दी गई। उस समय नन्ही मोना ने पूरे परिवार के साथ न्याय की लड़ाई लड़ी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा, लेकिन आखिरकार केस हार गईं। दिल टूट गया, पर हौसला नहीं टूटा। 2015 में एम.एससी (गणित) पूरी करते ही वही पुराने दुश्मन जाग गए। पिता की हत्या करने वालों से ही जमीन के विवाद में फंस गईं। आज भी मामला देहरादून के डोईवाला थाने में लंबित पड़ा है। इस सदमे के बाद मोना को अपना प्यारा देहरादून छोड़ना पड़ा। आँखों में आँसू और सीने में आग लेकर वे दिल्ली चली गईं।

सपनों का शिकार और लगातार असफलताएँ

दिल्ली के लक्ष्मी नगर में UPSC CSE की तैयारी की। IAS बनने का सपना देखा, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। विपरीत आर्थिक स्थिति के चलते फिर राज्य स्तर पर UKPSC की राह अपनाई।

– Lower PSC 2021 — फाइनल मेरिट में नाम नहीं (General category :19 marks से बाहर )

– UKPSC Upper 2021 — मेन्स दिया, पर इंटरव्यू तक नहीं पहुँच सकीं

-UKPSC 2024 FRO:Pre Clear, लेकिन मुख्य परीक्षा नहीं दी

Lower PCS 2021 की असफलता के बाद मोना पूरी तरह टूट गई थीं। गहरी उदासी छा गई थी।

ठीक उसी समय कोचिंग में बच्चों को पढ़ा रहे अब SDM पद पर तैनात उनके एक परिचित ने उन्हें पढ़ाई के लिए हल्द्वानी बुलाया और ढाढ़स बंधाया। मोना बिना कुछ सोचे हल्द्वानी आ गईं और वहाँ कोचिंग के साथ-साथ 2024 की तैयारी शुरू की।मोना ने सिर्फ तैयारी ही नहीं की, बल्कि अपने संघर्ष को आत्मनिर्भर बनाया। हल्द्वानी में रहते हुए उन्होंने “समर्पण” नाम से एक टेलीग्राम ग्रुप बनाया, जिसमें उन्होंने बच्चों को जीएस और अन्य विषय पढ़ाए, और साथ ही परीक्षार्थियों को निःशुल्क स्टडी मटेरियल उपलब्ध कराया।रात-दिन की मेहनत और साथ ही बच्चों को पढ़ाना और खुद की तैयारी — यह सब एक साथ चलता रहा। मोना ने कभी हार नहीं मानी। असफलताओं के बाद भी लगातार मेहनत जारी रखी। टेलीग्राम ग्रुप “समर्पण” के माध्यम से उन्होंने कई बच्चों की पढ़ाई में मदद की, जबकि खुद अपनी मंजिल की ओर बढ़ती रहीं। उनकी यह लगन और समर्पण देखकर कई लोग भावुक हो जाते हैं।

परिवार के समर्थन से मिली सफलता

पति ने भरोसा जताया और दिया पूरा साथ, परिवार के समर्थन से आखिर मिली सफलता मोना ने बार-बार भावुक होकर कहा कि इस सफलता में सबसे बड़ा योगदान उनके पति भगवत डंगवाल का है। पति स्तंभ बने और भरोसा जताकर पूरा साथ निभाया। विवाह के बाद मोना जब अल्मोड़ा के मझेड़ा गाँव में ससुराल आईं, तब से उनके पति ने लगातार उनका साथ निभाया। हर मुश्किल में पति भगवत डंगवाल उनके जीवन के मजबूत स्तंभ बने रहे। उन्होंने मोना के सपनों पर पूरा भरोसा जताया, आर्थिक-मानसिक दोनों स्तर पर अटूट सहयोग दिया और कभी हार मानने नहीं दिया।

मोना अक्सर कहती हैं कि पति के निरंतर समर्थन और पूर्ण विश्वास के बिना यह लंबा संघर्ष संभव नहीं होता। उनके ससुर जी (सूबेदार रिटायर्ड स्व. श्री कुंदन सिंह) ने भी हर कदम पर आर्थिक और मानसिक सहारा दिया, लेकिन दुर्भाग्य से पिछले साल अक्टूबर में उनका निधन हो गया। मोना की आँखें नम हो जाती हैं जब वे कहती हैं — “आज अगर ससुर जी होते तो कितने खुश होते… उनकी कमी आज भी बहुत खल रही है।” मोना के मुताबिक उनके दो सबसे मजबूत स्तंभ हैं — पति भगवत डंगवाल और पति की बहन (दीदी)। इन दोनों ने हर मुश्किल वक्त में उनका हाथ थामा। बिना इनके अटूट समर्थन के यह लंबा सफर अधूरा होता। परिवार की इस मजबूत नींव पर ही मोना का संघर्ष खड़ा रहा और आखिरकार सफलता मिली।

शैक्षणिक सफर– 10वीं — प्रथम श्रेणी – 12वीं — द्वितीय श्रेणी – बी.एससी (भौतिकी, गणित, भूविज्ञान) — प्रथम श्रेणी – एम.एससी गणित — प्रथम श्रेणी (D.B.S. P.G. College, Dehradun) – वर्तमान में हल्द्वानी में रहकर पीसीएस और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराती हैं।

एक प्रेरणादायक विजय

आज पूरे अल्मोड़ा, देहरादून और उत्तराखंड में मोना डंगवाल की सफलता की चर्चा है। उनकी कहानी उन हजारों लड़कियों और महिलाओं को प्रेरित करेगी जो जीवन की कठिनाइयों से जूझ रही हैं।मोना डंगवाल और उनके परिवार को STO पद पर चयनित होने पर हार्दिक बधाई और ढेर सारी शुभकामनाएँ। आपका लंबा संघर्ष व्यर्थ नहीं गया। परिवार के समर्थन और आपके अटूट हौसले ने साबित कर दिया कि सच्चा समर्पण कभी नहीं हारता। मोना ने भी इस संघर्ष में साथ और सीख देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया है।

आपकी कठिन मेहनत और संघर्ष से उत्तराखण्ड का हर वर्ग प्रेरणा लेगा और उत्तराखंड प्रदेश के वासियों को आपसे पूरी उम्मीदें हैं कि आप राज्य हित में पूरी श्रद्धा से प्रदेश के विकास के लिए कार्य करेंगी।

जय हिंद। जय उत्तराखंड।

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