भारत में तेल और गैस की वर्तमान स्थिति: ईरान युद्ध के कारण होर्मुज संकट, LPG पर दबाव लेकिन पेट्रोल-डीजल सुरक्षित (25 मार्च 2026)
नई दिल्ली, 25 मार्च 2026 – ईरान-इज़राइल-अमेरिका युद्ध के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावी रूप से बंद होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है, जो अपनी 85-90% कच्चे तेल की जरूरतें आयात से पूरी करता है। युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज मार्ग से भारत का लगभग 40-55% कच्चा तेल, 90% एलपीजी और काफी LNG आयात होता था। अब यह मार्ग बाधित होने से आयात में कमी आई है, कीमतें बढ़ी हैं और LPG संकट गहराया है।
सरकार का दावा है कि पेट्रोल, डीजल और घरेलू LPG की आपूर्ति पर्याप्त है, लेकिन औद्योगिक क्षेत्रों में गैस की कमी से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा कि अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और पेट्रोलियम, उर्वरक तथा कोयला पर्याप्त उपलब्ध है। फिर भी, रूस से तेल खरीद बढ़ाई गई है और वैकल्पिक स्रोतों से आयात तेज किया जा रहा है।
कच्चे तेल (Crude Oil) की स्थिति
- आयात निर्भरता: भारत अपनी कुल तेल खपत का 85-90% आयात करता है। दैनिक खपत लगभग 5 मिलियन बैरल है। युद्ध से पहले मध्य पूर्व (सऊदी, इराक, UAE आदि) से 50-55% आयात होता था, जिसमें से बड़ा हिस्सा होर्मुज से गुजरता था।
- वर्तमान प्रभाव: मार्च के पहले दो हफ्तों में कच्चे तेल के आयात में भारी गिरावट आई। सऊदी, इराक और UAE से लोडिंग प्रभावित हुई। व्यापार घाटा मार्च में $4 बिलियन से ज्यादा बढ़ने का अनुमान है।
- वैकल्पिक व्यवस्था: गैर-होर्मुज स्रोतों से आयात बढ़कर 70% हो गया है। रूस से मार्च में लगभग 30 मिलियन बैरल तेल खरीदा गया। अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और लातिन अमेरिका से भी अतिरिक्त खरीदारी हो रही है। भारत 40 देशों से तेल मंगाता है (2006-07 में केवल 27 देशों से)।
- कीमतें: ब्रेंट क्रूड $100-120 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया (कुछ दिनों में $119 तक)। भारतीय बास्केट की कीमत फरवरी के $69 से बढ़कर $101-127 तक पहुंची। इससे आयात बिल में अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
- भंडारण:
- रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR): कुल क्षमता 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT)। वर्तमान स्टॉक 3.37 MMT (64% भरा हुआ), जो लगभग 5-9.5 दिनों की जरूरत के बराबर है। तीन स्थानों (विशाखापट्टनम, मंगलुरु, पादुर) पर भंडारण।
- कुल बफर (SPR + ओएमसी स्टॉक): 74-90 दिनों की खपत के बराबर। रिफाइनरियां पूर्ण क्षमता (कुछ मामलों में 100% से ज्यादा) पर चल रही हैं।
- सरकारी कदम: पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखी गई हैं (दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77, डीजल ₹87.67 प्रति लीटर)। निर्यात की समीक्षा हो रही है ताकि घरेलू आपूर्ति प्रभावित न हो। तेल और गैस डेटा को राष्ट्रीय सुरक्षा संपत्ति घोषित किया गया है।
प्राकृतिक गैस और एलएनजी (Natural Gas & LNG) की स्थिति
- उत्पादन और खपत: घरेलू उत्पादन लगभग 90 MMSCMD (मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन)। कुल खपत 190-195 MMSCMD। आयात (मुख्यतः LNG) से आधी जरूरत पूरी होती है।
- प्रभाव: कतर से LNG आयात प्रभावित (फोर्स मेज्योर घोषणा)। मार्च की शुरुआत में 8 LNG कार्गो (0.56 MT) पहुंचे, जो फरवरी से 15% कम। 18-19 अतिरिक्त कार्गो की उम्मीद।
- सरकारी प्रबंधन: 9 मार्च 2026 को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत नेचुरल गैस कंट्रोल ऑर्डर जारी। घरेलू PNG और CNG को 100% आपूर्ति, उर्वरक को 70%, उद्योग को 80% तक। बाकी को प्राथमिकता आधार पर काटा गया।
- 2026 आउटलुक: LNG आयात 28-29 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है। शहर गैस वितरण नेटवर्क विस्तार से मांग बढ़ेगी।
एलपीजी (LPG) संकट और घरेलू प्रभाव
- निर्भरता: कुल खपत का 60% आयात, जिसमें 90% होर्मुज मार्ग से। घरेलू उत्पादन 1.158 MT/माह, आयात 2.192 MT/माह।
- संकट: होर्मुज बंदी से साप्ताहिक आयात 30% गिरा। रणनीतिक भंडारण केवल 5 दिनों का (140,000 टन)। कई होटल, रेस्तरां और उद्योग बंद हुए। उर्वरक और एल्यूमिनियम उत्पादन प्रभावित।
- सरकारी कदम:
- घरेलू उपयोग को प्राथमिकता। 23 मार्च से राज्यों को 20% ज्यादा LPG सप्लाई।
- कमर्शियल सिलेंडर वितरण शुरू, ब्लैक मार्केटिंग पर छापे।
- Piped Natural Gas (PNG) को बढ़ावा – 1.5 करोड़ घरों में PNG, 60 लाख और स्विच कर सकते हैं।
- घरेलू LPG उत्पादन 28% बढ़ाया गया।
- उपभोक्ता प्रभाव: Ujjwala योजना के तहत करोड़ों घर प्रभावित। पैनिक बुकिंग बढ़ी, लेकिन पर्याप्त स्टॉक होने का दावा।
आर्थिक प्रभाव और सरकार की तैयारी
- मुद्रास्फीति: तेल की कीमतों से मुद्रास्फीति पर दबाव, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रभाव “महत्वपूर्ण नहीं” क्योंकि मुद्रास्फीति निचले स्तर पर है।
- विकास दर: कुछ विश्लेषकों ने 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान 6.5% तक घटाया। गैस कमी से विनिर्माण PMI गिरा।
- रुपया: डॉलर की मांग बढ़ने से कमजोर।
- सकारात्मक पहलू: रिफाइनरियां पूर्ण क्षमता पर, रूस से बढ़ी खरीद, विविधीकरण (40 देशों से आयात)। SPR विस्तार चल रहा है (अतिरिक्त 6.5 MMT)।
- भविष्य: अगर युद्ध लंबा चला तो स्टैगफ्लेशन का खतरा। सरकार PNG को बढ़ावा दे रही है और नवीकरणीय ऊर्जा पर फोकस बढ़ा रही है।
ईरान युद्ध ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा की कमजोरियां उजागर कर दी हैं, लेकिन सरकार की सक्रिय कूटनीति, विविधीकरण और घरेलू उत्पादन बढ़ाने से पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति बनी हुई है। LPG पर दबाव है, इसलिए उपभोक्ताओं को PNG की ओर स्विच करने की सलाह दी जा रही है। स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लंबा संकट चुनौती बनेगा। नवीनतम अपडेट के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय और PIB की वेबसाइट देखें।
