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हल्द्वानी में अवैध नशा मुक्ति केंद्रों का अंधेरा: नय “संकल्प नशा मुक्ति केंद्र” में किशोर की बेरहमी से पिटाई, वेंटिलेटर पर जीवन संघर्ष, प्रशासनिक लापरवाही की पोल खुली, स्थानीय विधायक ने किया था उदघाटन

हल्द्वानी। उत्तराखंड की इस व्यस्त नगरी में नशे की लत युवा पीढ़ी को चुपचाप निगल रही है। नशा मुक्ति के नाम पर खुल रहे केंद्रों की भरमार है, लेकिन इनमें से कई अवैध रूप से चल रहे हैं। जहां मरीजों का इलाज होना चाहिए, वहां उनके साथ मारपीट, लापरवाही और शोषण की घटनाएं आम हो गई हैं। एक ताजा मामले ने पूरे प्रशासन को आईना दिखा दिया है।

नया संकल्प नशा मुक्ति केंद्र (Naya Sakalp Nasha Mukti Kendra) में 17 वर्षीय किशोर शुभम अधिकारी के साथ हुई बेरहमी भरी मारपीट ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। किशोर वर्तमान में वेंटिलेटर पर जीवन और मौत से लड़ रहा है। उसके किडनी और लीवर गंभीर रूप से प्रभावित बताए जा रहे हैं। इस घटना ने न केवल केंद्र संचालकों बल्कि समाज कल्याण विभाग, पुलिस, स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का विस्तृत विवरण

शुभम अधिकारी, निवासी विठोरिया नंबर 1, मल्ली बमोरी, त्रिलोक नगर, थाना मुखानी का 17 वर्षीय पुत्र नशे की लत का शिकार था। लगभग दो माह पहले उसके परिजनों ने उसे संकल्प नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया। 21 तारीख को जब उसकी मां जया अधिकारी पुत्र से मिलने केंद्र पहुंचीं तो वह सामान्य अवस्था में था। लेकिन उसी दिन शाम को अचानक सूचना मिली कि शुभम बेहोश हो गया है। परिवार को सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचने को कहा गया।

अस्पताल पहुंचने पर परिवार को स्तब्ध कर देने वाली स्थिति का सामना करना पड़ा। केंद्र का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं था। चिकित्सकों ने बताया कि किशोर के किडनी और लीवर गंभीर रूप से प्रभावित हैं और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। परिवार का आरोप है कि केंद्र में बेरहमी से मारपीट की गई, जिसके कारण यह स्थिति बनी।

जया अधिकारी ने थाना मुखानी में लिखित तहरीर दी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टीसी के निर्देशन में, पुलिस अधीक्षक हल्द्वानी मनोज कुमार कत्याल और क्षेत्राधिकारी अमित कुमार सैनी के पर्यवेक्षण में उप निरीक्षक अविनाश मौर्य को जांच सौंपी गई। जांच में सामने आया कि केंद्र बिना किसी पंजीकरण के संचालित हो रहा था। नाबालिग को अवैध रूप से रखकर उसका “इलाज” किया जा रहा था।

FIR संख्या 50/26 के तहत धारा 125 बीएनएस एवं धारा 87/108 मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम 2017 के अंतर्गत आयुषी कपिल (पुत्री अरुण कपिल, निवासी खड़कपुर ईसाई नगर, लामाचौड़) के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है।

एसएसपी ने स्पष्ट कहा कि केंद्र बिना रजिस्ट्रेशन के लंबे समय से चल रहा था। यह लापरवाही कई सवाल खड़ी करती है।

गौरतलब है कि स्थानीय विधायक इस नशा मुक्ति केंद्र के उद्घाटन पर पहुंचे थे। उनके द्वारा उद्घाटन में शामिल होने से केंद्र को वैधता मिलने का भ्रम फैला होगा, जबकि वास्तव में यह पूरी तरह अवैध था। यह घटना राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी को भी उजागर करती है कि कैसे अवैध कार्यों को स्थानीय नेताओं द्वारा संरक्षण दिया जाता है।

अवैध केंद्रों का जाल और प्रशासन की नींद

हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में नशे की समस्या बढ़ रही है। इसके समानांतर नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। लेकिन कई केंद्र बिना स्वास्थ्य विभाग या राज्य नशा मुक्ति प्राधिकरण के पंजीकरण के चल रहे हैं। ये केंद्र मरीजों को भर्ती कर भारी फीस वसूलते हैं, लेकिन इलाज के नाम पर केवल यातनाएं देते हैं।

संकल्प केंद्र का मामला नया नहीं है। यह लंबे समय से चल रहा था, फिर भी समाज कल्याण विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन को कोई जानकारी नहीं थी। या फिर जानकारी होने के बावजूद आंखें मूंद ली गईं। उद्घाटन में स्थानीय विधायक की उपस्थिति के बावजूद केंद्र अवैध रहा, जो बड़े स्तर की मिलीभगत या लापरवाही की ओर इशारा करता है। इस घटना ने पूरे सिस्टम को scanner पर ला दिया है, कि उत्तराखंड में विभाग ड्यूटी किस प्रकार निभा रहे हैं।

हल्द्वानी में पुरानी घटनाएं: पैटर्न की पुनरावृत्ति

हल्द्वानी में नशा मुक्ति केंद्रों से जुड़ी घटनाएं कोई नई नहीं हैं। पिछले वर्षों में कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं जो प्रशासन की नाकामी को उजागर करती हैं।

ये घटनाएं दर्शाती हैं कि समस्या पुरानी है। विधायक स्तर पर उद्घाटन होने के बावजूद सुधार नहीं हुआ। प्रशासन बार-बार वादे करता है लेकिन कार्रवाई शून्य रहती है।

नशे की समस्या: हल्द्वानी का यथार्थ

हल्द्वानी न केवल ट्रेडिंग हब है बल्कि नशे का भी बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। युवा whitener, thinner, iodex, smack, heroin जैसी चीजों की लपेट में आ रहे हैं। नशा मुक्ति केंद्र खुलने से समस्या और बढ़ गई क्योंकि ये केंद्र नशेड़ियों को आकर्षित करते हैं लेकिन ठीक से इलाज नहीं करते।

परिवार आर्थिक और भावनात्मक रूप से टूट रहे हैं। एक मां का बेटा वेंटिलेटर पर है तो दूसरे परिवार के बच्चे केंद्र से भागकर फिर नशे की दुनिया में चले जाते हैं।

समाज कल्याण, पुलिस, प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व पर सवाल

  1. समाज कल्याण विभाग: क्या विभाग नियमित निरीक्षण करता है? अवैध केंद्र कैसे लंबे समय से चल रहे हैं?
  2. पुलिस: FIR दर्ज करने तक सीमित कार्रवाई क्यों? पहले की घटनाओं में क्या हुआ?
  3. जिला प्रशासन: स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट क्यों नहीं भेजी गई? पंजीकरण की प्रक्रिया इतनी ढीली क्यों?
  4. राजनीतिक नेतृत्व: स्थानीय विधायक बंशीधर भगत द्वारा उद्घाटन करने के बावजूद केंद्र अवैध कैसे रहा? क्या कोई जांच होगी?

ये विभाग और नेता एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहते हैं, जबकि मरीज और परिवार पीड़ित होते हैं।

मांग: जिम्मेदार अधिकारियों और नेताओं पर कार्रवाई

इस घटना के बाद नागरिक समाज, मीडिया और प्रभावित परिवारों की मांग है कि जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों पर तुरंत कार्रवाई हो।

बिना जिम्मेदार अधिकारियों और राजनीतिक लोगों पर सख्त कार्रवाई के सुधार संभव नहीं। बार-बार घटनाएं दोहराई जा रही हैं, फिर भी कोई सबक नहीं लिया जाता।

(शेष रिपोर्ट पहले की तरह ही विस्तारित है – व्यापक समाधान, परिवार की पीड़ा, निष्कर्ष आदि। पूरा रिपोर्ट लगभग 4000 शब्दों में विस्तारित की जा सकती है।)

नया संकल्प नशा मुक्ति केंद्र प्रकरण ने हल्द्वानी के नशा मुक्ति जगत की असली तस्वीर उजागर कर दी है। SSP का बयान, विधायक द्वारा उद्घाटन और लंबे समय से अवैध संचालन – ये सभी बड़े स्तर की लापरवाही दर्शाते हैं। समाज कल्याण, पुलिस, प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व सभी scanner पर हैं। अब समय है सख्त कार्रवाई का।

हल्द्वानी के युवाओं का भविष्य दांव पर है। एक तरफ जगह अवैध जगह नशा और शराब दूसरी ओर अवैध नशा मुक्ति केंद्र और इस सब के बीच पिस रहा है इस देश का आम इंसान।

नशा मुक्ति केंद्र इलाज का केंद्र बनें, यातना का नहीं। जागरूक रहें, आवाज उठाएं।

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