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देहरादून: हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा के कॉलेज कंसर्ट में अभद्र भाषा का विवाद, उन पर और आयोजकों पर FIR दर्ज, राज्य में कानून व्यवस्था मजबूत करने की मांग तेज

VIGILANCE ACTION ON CORRUPTION

14-04-2026, देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 11 अप्रैल 2026 को डीएवी (पीजी) कॉलेज में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में हरियाणवी लोक सिंगर मासूम शर्मा के लाइव परफॉर्मेंस ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। छात्र संघ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मासूम शर्मा ने स्टेज पर गाली-गलौज और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे उपस्थित छात्रों, शिक्षकों और आम नागरिकों की भावनाएं आहत हुईं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देहरादून पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सिंगर मासूम शर्मा, कार्यक्रम के आयोजकों और छात्र संघ के कुछ सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

घटना की जानकारी देते हुए दालनवाला पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने बताया कि 11 अप्रैल की शाम को डीएवी पीजी कॉलेज में छात्र संघ के तत्वावधान में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा का लाइव परफॉर्मेंस था। शुरुआत में माहौल उत्साही था और छात्र उनके पॉपुलर गानों पर झूम रहे थे। लेकिन बीच कार्यक्रम में कुछ युवकों द्वारा स्टेज पर घुसपैठ और बवाल करने की कोशिश के बाद मासूम शर्मा गुस्से में आ गए और उन्होंने स्टेज से खुलेआम गाली-गलौज शुरू कर दी। उन्होंने अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कुछ लोगों को निशाना बनाया, जिससे पूरा हॉल सन्न रह गया। कई छात्रों ने असहज महसूस किया और कार्यक्रम बीच में ही बिगड़ गया।

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मासूम शर्मा माइक पर गरजते हुए कह रहे हैं और गाली-गलौज कर रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद कॉलेज परिसर के बाहर भी कुछ लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। छात्र प्रतिनिधि प्रांचल नौनी और स्थानीय वकील संदीप चमोली समेत कई लोगों ने दालनवाला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सिंगर की अभद्र भाषा से युवा छात्रों की भावनाएं आहत हुईं और यह सार्वजनिक स्थान पर अनुशासनहीनता का उदाहरण है।

देहरादून पुलिस के सिटी एसपी प्रमोद कुमार ने बताया कि शिकायत और सोशल मीडिया वीडियो के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 296 (अश्लीलता), 352 (हमला या आपराधिक बल का उपयोग), 79 और 351(3) के तहत मासूम शर्मा, कार्यक्रम आयोजकों और संबंधित छात्र संघ सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब सभी पक्षों से पूछताछ कर रही है और जांच तेज कर दी गई है। मासूम शर्मा पर पहले भी कई विवादों का आरोप रहा है, लेकिन देहरादून की इस घटना ने उत्तराखंड में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मॉनिटरिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस घटना ने पूरे उत्तराखंड में कानून व्यवस्था को लेकर चर्चा छेड़ दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार पहले से ही राज्य में शांति और अनुशासन बनाए रखने पर जोर दे रही है, लेकिन ऐसे सार्वजनिक कार्यक्रमों में अभद्र भाषा और बवाल की घटनाएं राज्य की छवि को खराब कर रही हैं। विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि देवभूमि उत्तराखंड एक पवित्र और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील राज्य है। यहां धार्मिक पर्यटन, चारधाम यात्रा और युवा शिक्षा के केंद्र के रूप में देहरादून की अहम भूमिका है। ऐसे में कॉलेज जैसे शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित कार्यक्रमों में सख्त मॉनिटरिंग जरूरी है।

विभिन्न संगठनों और अभिभावकों ने मांग की है कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ऐसे कार्यक्रमों की पूर्व अनुमति, कलाकारों की पृष्ठभूमि जांच और स्टेज पर होने वाली गतिविधियों की लाइव निगरानी सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि अगर आयोजक जिम्मेदारी से काम नहीं करेंगे तो युवाओं पर गलत प्रभाव पड़ेगा। देहरादून के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बयान जारी कर कहा कि यह सिर्फ एक सिंगर की गलती नहीं है, बल्कि आयोजकों की लापरवाही भी जिम्मेदार है। उन्होंने मांग की कि कॉलेज प्रशासन और छात्र संघ पर भी कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की जाएं।

उत्तराखंड पुलिस के उच्च अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। हाल के वर्षों में देहरादून समेत विभिन्न शहरों में बढ़ते सांस्कृतिक और मनोरंजन कार्यक्रमों को देखते हुए पुलिस ने सभी जिला प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे आयोजनों की पूर्व सूचना लें और जरूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ सांस्कृतिक संवेदनशीलता का ध्यान रखें।

मासूम शर्मा की तरफ से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, हालांकि उनके कुछ समर्थकों का कहना है कि स्टेज पर कुछ गुंडागर्द तत्वों द्वारा बाधा डालने के कारण उन्होंने गुस्सा व्यक्त किया। लेकिन पुलिस और आम जनता का रुख साफ है कि सार्वजनिक मंच पर अभद्र भाषा किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।

यह घटना उत्तराखंड में कानून व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। राज्य सरकार को अब सांस्कृतिक कार्यक्रमों, कॉलेज फेस्ट और पब्लिक परफॉर्मेंस के लिए सख्त नियम बनाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं। देहरादून जैसे शैक्षणिक और पर्यटन केंद्र में युवाओं का सही मार्गदर्शन और अनुशासन बनाए रखना बेहद जरूरी है। पुलिस जांच के नतीजे आने के बाद आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी, लेकिन फिलहाल यह मामला पूरे राज्य में बहस का विषय बन गया है।

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