Site icon Himanjaliexpress.com

पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र सिंह पाल का तीखा हमला – “बागी और मौकापरस्त नेताओं को पार्टी में वापस नहीं लाया जाए, वफादार कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाए

नैनीताल/देहरादून, 3 अप्रैल 2026 – उत्तराखंड कांग्रेस में रामनगर सीट को लेकर चल रही गुटबाजी अब खुलकर सड़क पर आ गई है। पूर्व सांसद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. महेंद्र सिंह पाल ने रामनगर के बागी कांग्रेसी संजय नेगी की पार्टी में वापसी का कड़ा विरोध करते हुए अप्रत्यक्ष हमला बोला है। डॉ. पाल ने कहा कि जो नेता संकट के समय पार्टी छोड़कर चले गए, वे मौकापरस्त हैं। उन्हें वापस लाकर पार्टी को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। इसके बजाय उन नए और वफादार कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाए जो 2017 और 2022 के चुनावों में पार्टी के साथ खड़े रहे।

यह बयान ऐसे समय आया है जब हरीश रावत संजय नेगी को कांग्रेस में शामिल करवाने के लिए हाईकमान पर दबाव बना रहे थे। 28 मार्च को दिल्ली में होने वाली ज्वाइनिंग में संजय नेगी का नाम अंतिम समय में कट गया, जिसके बाद हरीश रावत ने 15 दिन का राजनीतिक अवकाश ले लिया। डॉ. पाल ने स्पष्ट कहा, “जो लोग बागी नेताओं को वापस लाने की पैरवी कर रहे हैं, उन्हें पहले 2022 के विधानसभा चुनाव में जवाब देना चाहिए कि तब उन्होंने बागी प्रत्याशी को आधिकारिक प्रत्याशी के पक्ष में उम्मीदवारी वापस क्यों नहीं करवाई?”

डॉ. महेंद्र सिंह पाल का यह बयान न सिर्फ रामनगर की स्थानीय राजनीति का आईना है, बल्कि पूरे उत्तराखंड कांग्रेस की आंतरिक कलह, परिवारवाद, लॉबिंग और पार्टी को कमजोर करने वाली साजिशों को उजागर करता है। पूर्व सांसद ने अपनी पूरी राजनीतिक ईमानदारी और पार्टी के प्रति समर्पण का उदाहरण देते हुए कहा कि 2022 में उन्हें रामनगर सीट से नामांकन मात्र दो दिन पहले मिला। फिर भी उन्होंने पूरी निष्ठा से चुनाव लड़ा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूरी ईमानदारी से उनका साथ दिया। जीत के बेहद करीब पहुंचने के बावजूद वे थोड़े अंतर से हार गए। लेकिन संजय नेगी (जो उस समय बागी होकर निर्दलीय लड़े) ने कांग्रेस के वोट काटे, जिससे पार्टी को नुकसान हुआ।

डॉ. महेंद्र सिंह पाल का राजनीतिक और पेशेवर रिकॉर्ड: एक समर्पित सिपाही की कहानी

डॉ. महेंद्र सिंह पाल उत्तराखंड कांग्रेस के उन विरले नेताओं में से एक हैं जिन्होंने पार्टी के लिए न सिर्फ राजनीतिक संघर्ष किया, बल्कि कानूनी क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई। वे सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट हैं, उत्तराखंड हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं और उत्तराखंड बार काउंसिल के चेयरमैन रह चुके हैं। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के भी कई बार अध्यक्ष रह चुके हैं। वे उत्तराखंड हाईकोर्ट के अतिरिक्त एडवोकेट जनरल भी रह चुके हैं और सुप्रीम कोर्ट में राज्य की ओर से कई महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी कर चुके हैं। सैनिक बोर्ड हल्द्वानी के लीगल एडवाइजर के रूप में भी उन्होंने सेवा की।

राजनीतिक क्षेत्र में डॉ. पाल का रिकॉर्ड गौरवशाली है। वे नैनीताल लोकसभा सीट से दो बार सांसद चुने गए – 1991 और 2002। उस समय नैनीताल-उधम सिंह नगर क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ था। डॉ. पाल की जीत ने पार्टी को मजबूती दी। बाद में उनके करीबी मित्र और रिश्तेदार के. चंद “बाबा” ने भी इसी सीट से दो बार सांसद के रूप में सेवा की। लेकिन कांग्रेस की अंदरूनी कलह ने इस सीट को भाजपा के हवाले कर दिया। 2017 और 2022 के चुनावों में पार्टी की भारी हार का एक बड़ा कारण यही गुटबाजी रही। उन्होंने कहा कि जिनके नेतृत्व में पार्टी 2017 और 2022 का चुनाव बुरी तरह हार गई, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा में भी हार झेली। 2019 में कांग्रेस की नैनीताल लोकसभा से आजतक सबसे करारी हार हुई, तब 2019 में हरीश रावत चुनाव लड़ रहे थे।

डॉ. पाल ने हमेशा पार्टी की एकता और वफादारी पर जोर दिया। उन्होंने कभी भी व्यक्तिगत लाभ के लिए पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचाया।

2022 के विधानसभा चुनाव में रामनगर सीट से डॉ. पाल को टिकट मिला तो मात्र दो दिन पहले नामांकन हुआ। फिर भी उन्होंने पूरे जोर-शोर से प्रचार किया। गांव-गांव घूमे, कार्यकर्ताओं को एकजुट किया और जीत के बेहद करीब पहुंच गए। लेकिन संजय नेगी के निर्दलीय चुनाव लड़ने से कांग्रेस के वोट बंट गए। डॉ. पाल हार गए, लेकिन उनकी मेहनत और समर्पण को पूरे प्रदेश ने सराहा। आज भी रामनगर के लोग उन्हें “ईमानदार और संघर्षशील नेता” मानते हैं।

डॉ. पाल का तीखा बयान: मौकापरस्तों को प्राथमिकता नहीं, वफादारों को मिले अवसर

डॉ. पाल ने अपने बयान में स्पष्ट किया – “जिन लोगों ने संकट के समय कांग्रेस छोड़ी, वे मौकापरस्त हैं। उन्हें वापस लाकर पार्टी को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। 2017 और 2022 के चुनावों में कुछ नेताओं के नेतृत्व में पार्टी बुरी तरह हारी। वे खुद अपनी सीटें भारी अंतर से हारे और कई स्टालवार्ट नेताओं को भी हार का सामना करना पड़ा। पार्टी को कमजोर करने वाले लोग अब फिर साजिश रच रहे हैं। जबकि इस बार पार्टी रिकवर कर रही है और 2027 के चुनावों में जीत के करीब है, वही पुरानी राजनीति खेली जा रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “पार्टी को साफ-सुथरा और स्पष्ट होना चाहिए। अगर हमने मौकापरस्तों को प्राथमिकता दी तो पार्टी के मानदंड और भारत की दृष्टि दोनों गिर जाएंगे। नए कार्यकर्ता जो बुरे समय में पार्टी के साथ खड़े रहे, उन्हें टिकट और पद मिलने चाहिए।”

यह बयान रणजीत सिंह रावत के हालिया आरोपों से भी जुड़ता है, जहां उन्होंने हरीश रावत पर परिवार के लिए रामनगर से लॉबिंग का आरोप लगाया था। डॉ. पाल का बयान कांग्रेस की आंतरिक एकता की अपील है, लेकिन साथ ही लॉबिंग और बागियों को संरक्षण देने की प्रवृत्ति पर सवाल भी है।

नैनीताल-उधम सिंह नगर: कांग्रेस का गढ़ से भाजपा का किला बनने की कहानी

डॉ. पाल के सांसद काल में नैनीताल लोकसभा सीट कांग्रेस का मजबूत गढ़ थी। उनकी दो जीतों ने क्षेत्र में पार्टी की जड़ें मजबूत कीं। उनके करीबी के. चंद “बाबा” ने भी दो बार यहां से सांसद बनकर सेवा की। लेकिन 2014 के बाद कांग्रेस की अंदरूनी कलह, गुटबाजी और कुछ नेताओं के व्यक्तिवाद ने सीट भाजपा के पास चली गई। 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी रामनगर समेत आसपास की सीटों पर कांग्रेस हारी। डॉ. पाल का कहना है कि यदि पार्टी वफादारों को आगे बढ़ाती तो आज स्थिति अलग होती।

2022 का रामनगर चुनाव

2022 में डॉ. पाल को टिकट मिलने में देरी हुई। नामांकन दो दिन पहले हुआ। फिर भी उन्होंने रात-दिन मेहनत की। कांग्रेस कार्यकर्ता उनके साथ खड़े रहे। लेकिन संजय नेगी ने बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ा और कांग्रेस के वोट काटे। नतीजा – डॉ. पाल हार गए, हालांकि अंतर बहुत कम था। डॉ. पाल ने कहा, “मैंने पूरी ईमानदारी से लड़ाई लड़ी। यदि बागी न होते तो जीत निश्चित थी।”

पार्टी की रिकवरी और पुरानी साजिश

डॉ. पाल ने कहा कि 2027 के चुनावों में कांग्रेस रिकवर कर रही है। कार्यकर्ता उत्साहित हैं। लेकिन कुछ लोग फिर वही पुरानी राजनीति खेल रहे हैं – बागियों को वापस लाकर पार्टी को कमजोर करना। उन्होंने चेतावनी दी, “यदि पार्टी साफ नहीं हुई तो भारत की राजनीतिक दृष्टि और मानदंड दोनों गिर जाएंगे।”

डॉ. पाल की विरासत: समर्पण, ईमानदारी और कानूनी योगदान

डॉ. पाल न सिर्फ राजनेता हैं, बल्कि एक बेहतरीन वकील भी। सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण मामलों में उन्होंने उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व किया। बार काउंसिल के चेयरमैन के रूप में उन्होंने वकीलों के हितों की रक्षा की। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कई सुधार किए। उनकी पत्नी लेफ्टिनेंट कर्नल मीना सिंह पाल सेना से सेवानिवृत्त हैं। परिवार हमेशा राष्ट्र सेवा में रहा।

कांग्रेस को साफ-सुथरा बनाने का समय

डॉ. महेंद्र सिंह पाल का बयान उत्तराखंड कांग्रेस के लिए एक बड़े संदेश की तरह है। रामनगर की यह लड़ाई अब पूरे प्रदेश की एकता की परीक्षा बन गई है। यदि पार्टी वफादारों को प्राथमिकता देगी तो 2027 में वापसी संभव है। अन्यथा, मौकापरस्तों और बागियों के कारण फिर हार का सामना करना पड़ेगा। यह विवाद सिर्फ रामनगर तक सीमित नहीं। यह पूरे कुमाऊं मंडल और उत्तराखंड कांग्रेस की भविष्य की दिशा तय करेगा।

Exit mobile version