Site icon Himanjaliexpress.com

चेक बाउंस मामलों में ई-समन की अनुमति, उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अब चेक बाउंस मामलों (परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत) में आरोपी को समन ईमेल और व्हाट्सएप के माध्यम से भी भेजे जा सकेंगे। यह व्यवस्था *उत्तराखंड इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेस रूल्स, 2025 के तहत लागू की गई है, जो देशभर में लंबित लाखों चेक बाउंस मामलों को तेजी से निपटाने में मदद करेगी।

हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, शिकायतकर्ता को शिकायत दर्ज करते समय आरोपी का ईमेल और व्हाट्सएप नंबर देना अनिवार्य होगा, साथ ही हलफनामा भी। समन में ऑनलाइन पेमेंट लिंक होगा, जिससे आरोपी सीधे राशि जमा कर मामला सुलझा सकेगा। गलत जानकारी देने पर शिकायतकर्ता पर कार्रवाई होगी। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों पर आधारित है, जहां चेक बाउंस मामलों के बोझ को कम करने पर जोर दिया गया।

धारा 138 क्या है और क्यों महत्वपूर्ण?

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 चेक बाउंस को दंडनीय अपराध बनाती है, मुख्य रूप से खाते में पर्याप्त राशि न होने पर। अपराध के लिए जरूरी शर्तें: कानूनी दायित्व के लिए चेक जारी होना, बैंक से अनादर, 30 दिनों में नोटिस, 15 दिनों में भुगतान न होना और फिर शिकायत। सजा: 2 साल तक कैद या चेक राशि का दोगुना जुर्माना। मुख्य उद्देश्य मुआवजा दिलाना है। देश में लाखों ऐसे मामले लंबित हैं, जिनमें समन तामील की देरी मुख्य समस्या है। यह नया नियम डिजिटल माध्यम से इस देरी को खत्म करेगा।

ई-कोर्ट्स क्यों जरूरी: बैकलॉग और देरी की बड़ी समस्या

भारतीय अदालतों में 5.3 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं (सितंबर 2025 तक), जिनमें 1.8 लाख से ज्यादा 30 साल पुराने। जनता की मुख्य शिकायतें: बार-बार तारीखें, समन में देरी, यात्रा-खर्च और वर्षों लगना। इससे जेलों में अंडरट्रायल की भीड़, व्यापार बाधित और न्याय में विश्वास की कमी। आर्थिक नुकसान GDP का 2% से अधिक।

ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट (2007 से चल रहा, फेज-III में ₹7,210 करोड़) इन समस्याओं का समाधान है:

उत्तराखंड हाईकोर्ट की यह पहल ई-कोर्ट्स की ही देन है। अन्य हाईकोर्ट्स ने भी समान कदम उठाए:

विशेषज्ञों का कहना है कि ई-कोर्ट्स जैसे डिजिटल समाधान अन्य क्षेत्रों में भी लागू हों तो जनता को तेज और प्रभावी राहत मिल सकती है। पीड़ितों को न्याय और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित करने की जरूरत है।

Exit mobile version