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भारत में कैंसर का खतरनाक गंभीर संकट : ताज़ा आंकड़े और चेतावनी रिपोर्ट

भारत में कैंसर

भारत में कैंसर का खतरनाक गंभीर भय्वाहक संकट

भारत आज उन देशों में शामिल है जहां कैंसर एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। ICMR-NCRP, Globocan 2022 और हालिया राष्ट्रीय प्रोजेक्शन के अनुसार, देश में कैंसर के नए मामलों और मौतों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है, जो रोकथाम, स्क्रीनिंग और उपचार प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करती है।

भारत में कैंसर के ताज़ा आंकड़े यह बहुत गंभीर संज्ञान है (2022–2026)

भारत में जीवनकाल कैंसर जोखिम 1 में 9 (11%) है।
मिजोरम में यह जोखिम सबसे अधिक—पुरुष 21.1%, महिलाएं 18.9%


वैश्विक परिदृश्य: WHO–IARC की 2026 रिपोर्ट

WHO और IARC की फरवरी 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट (Nature Medicine) के अनुसार:

लंग, स्टमक और सर्वाइकल कैंसर में लगभग आधे मामले रोके जा सकते हैं
यह रिपोर्ट World Cancer Day 2026 से पहले जारी की गई, जिससे रोकथाम की अपार संभावनाएं स्पष्ट होती हैं।


राष्ट्रीय स्तर पर कैंसर का बोझ: ट्रेंड और चिंता

Globocan 2022 के अनुसार:

Cancer प्रमुख कैंसर प्रकार

स्क्रीनिंग की स्थिति (NFHS-5)

देर से जांच के कारण Stage III–IV में निदान आम है
इसी वजह से 2015–2024 में:


राज्यवार कैंसर बोझ (2024–2025)

उच्च जोखिम वाले क्षेत्र


(Cancer Cases in India)भारत में कैंसर का गंभीर संकट: नवीनतम आंकड़ों पर आधारित विस्तृत रिपोर्ट


भारत में कैंसर प्रमुख कारण: 40–70% कैंसर रोके जा सकते हैं .


कैंसर जेनेटिक्स


आम जनता के लिए सिद्ध रोकथाम उपाय

अनिवार्य/अनुशंसित जांचें (NPCDCS)

30 वर्ष से ऊपर सभी के लिए

आयुष्मान भारत और HWCs के तहत कई जांचें मुफ्त/कम लागत पर उपलब्ध।

उपचार सुविधाएं


निष्कर्ष

जीवनशैली बदलाव, समय पर स्क्रीनिंग और जागरूकता से 37–40% कैंसर रोके जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत में समय पर स्क्रीनिंग, जागरूकता अभियानों और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए तो कैंसर से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। सरकारी योजनाओं, निजी क्षेत्र और समाज की साझेदारी से ही इस बढ़ते स्वास्थ्य संकट से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।नीतियों और जनभागीदारी से लाखों जीवन बचाए जा सकते हैं।

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